भभुआ सदर. रमजान इस्लाम धर्म का पाक महीना माना जाता है, जिसकी शुरुआत इस बार दो मार्च यानी आज से हो रही है. मुस्लिम समाज के लोग आज अहले सुबह सेहरी करने के साथ रोजा रखना शुरू कर दिये है. गौरतलब है कि रमजान में रोजे रखना इस्लाम के पांच स्तंभ में से एक है. 30 दिनों तक चलने वाला यह पवित्र पर्व रमजान अल्लाह के इबादत का पर्व है. इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे 30 दिन धूप और गर्मी में रोजा रख हर रोज शाम को इफ्तार करेंगे और रमजान के ठीक तीसवें दिन ईद का पर्व मनायेंगे. मुस्लिम जानकार असलम अंसारी ने बताया कि आज से रोजा शुरू होने के एक दिन पहले शनिवार से ईदगाह और मस्जिदों में तरावीह शुरू हो चुकी है. इस्लाम में भी हर मुसलमान को दिन में पांच बार नमाज पढ़ने का नियम है, लेकिन रमजान में छह बार नमाज पढ़ी जाती है. छठी नमाज रात में होती है, इसे ही तरावीह कहा जाता है. रमजान में इस नमाज में हर दिन थोड़ा-थाेड़ा कर के पूरी कुरान पढ़ी जाती है. रमजान के इस महीने में मुस्लिमों द्वारा फितरा और जकात अपनी हैसियत के मुताबिक देना होता है. = इस्लामिक महीना का नवां महीना रमजान का मुस्लिम जानकार मौलाना तौकीर ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के नवां महीना रमजान का होता है. रमजान के पाक महीने में अल्लाह बंदों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देता है. रोजा अल्लाह का दिया नायाब तोहफा है. रमजान महीने में अकीदतमंद खुद को अल्लाह के लिए समर्पित कर देता है और गुनाहों से बचकर पूरे माह रोजा रख इबादत कर बंदे अल्लाह को राजी करते हैं. = रमजान के तीनों अशरों का है अपना महत्व मौलाना तौकीर के अनुसार, रमजान माह के शुरुआती 10 दिन को पहला अशरा कहा जाता है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमतें नाजिल करता है. अगले 10 दिन दूसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों पर मगफिरत नाजिल करता है. जिसमें अकीदतमंद अपने मरहूम बुजुर्गों के मगफिरत की दुआ मांगते हैं. जबकि अंतिम 10 दिनों के तीसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों को जहन्नुम से आजादी अता फरमाता है. इसी पाक महीने में अंतिम संदेष्टा नबी मोहम्मद साहब पर कुरआन नाजिल किया था. पवित्र कुरआन ए पाक नाजिल होने से रमजान महीने का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसके अलावा रमजान जकात, खैरात और सदका देने का महीना भी है. इसी माह में गरीबों की मदद करना अन्य महीनों से ज्यादा अच्छा माना गया है, जिससे गरीब लोग भी ईद का त्योहार हंसी खुशी से मना सकें.
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