Kaimur News : जिला कल्याण पदाधिकारी से जवाब तलब, 15 दिनों में मांगा जवाब

जिले के छात्रावासों की जांच में उजागर हुई कुव्यवस्था, जवाब नहीं देने पर प्रपत्र ''क'' गठित करते हुए होगी कार्रवाई

भभुआ नगर. कल्याण विभाग से गठित समिति की जांच रिपोर्ट ने जिले में संचालित छात्रावासों की कुव्यवस्था की पोल खोल दी है. समिति ने जांच के बाद रिपोर्ट दी है कि कहीं भवन से पानी टपकता मिला, तो कहीं पाइप लीकेज से कमरे में सिढ़न की समस्या देखी गयी. कहीं भवन की बाहरी दीवार पर पीपल का पेड़ उगा मिला, तो कहीं दीवारों में दरारें दिखीं. किसी छात्रावास का टीवी बंद मिला, तो कहीं कमरे से लेकर शौचालय तक गंदगी पायी गयी. रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए अपर सचिव, कल्याण विभाग ने कैमूर के जिला कल्याण पदाधिकारी रत्नेश कुमार सिंह से जवाब तलब किया है. आदेश में कहा गया है कि समिति ने राजकीय आंबेडकर कल्याण छात्रावास नंबर 2, 3 और 4 की जांच की है. रिपोर्ट के आधार पर जिला कल्याण पदाधिकारी पर आरोप पत्र गठित किया गया है. उन्हें आदेश दिया गया है कि 15 दिनों में जवाब प्रस्तुत करें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई की जायेगी. गौरतलब है कि बीते माह राज्य महादलित आयोग ने जिले के छात्रावासों का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में भारी कुव्यवस्था सामने आयी थी. उसी आधार पर विभाग ने समिति गठित कर जांच करायी, जिसमें खामियां सही पायी गयीं. छात्रावास में बने 18 शौचालय, चालू मिले सिर्फ छह जांच समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. डॉ आंबेडकर कल्याण छात्रावास नंबर दो के निरीक्षण में 100 छात्रों का नामांकन दर्ज पाया गया, लेकिन मौके पर सिर्फ 76 छात्र मौजूद थे. शेष 24 छात्रों का नामांकन तो हुआ है, लेकिन वे अभी तक छात्रावास नहीं आये हैं.रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रावास में 18 शौचालय बने हैं, लेकिन सिर्फ छह ही चालू हालत में मिले. भवन में सिढ़न, दीवारों पर पीपल का पेड़, क्लास रूम में गंदगी, टीवी खराब और डिजिटल पढ़ाई न होना जैसी समस्याएं सामने आयीं. समिति के अनुसार अन्य छात्रावासों की स्थिति भी कमोबेश इसी तरह की है. समिति ने 34 पेज में दी रिपोर्ट जांच के बाद समिति ने 34 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें तस्वीरों के साथ छात्रावासों की स्थिति दर्ज की गयी है. रिपोर्ट में गंदगी, छत से पानी टपकने और रखरखाव की बदहाल स्थिति का उल्लेख है. गौरतलब है कि कल्याण विभाग हर वर्ष छात्रावासों के रखरखाव और छात्रों पर लाखों रुपये खर्च करता है. इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो गंभीर और सोचनीय विषय है.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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