दुर्गावती जलाशय की बदहाल नहर खेतों की प्यास बुझाने में असफल

र्गावती जलाशय परियोजना का बदहाल बायां तट नहर केनाल आज भी खेतों की प्यास बुझाने में असफल साबित हो रहा है. पटवन के अहम मौके पर जर्जर बायां तट के टूटते रहने से किसानों के खेतों का पटवन बाधित हो जाता है

भभुआ. दुर्गावती जलाशय परियोजना का बदहाल बायां तट नहर केनाल आज भी खेतों की प्यास बुझाने में असफल साबित हो रहा है. पटवन के अहम मौके पर जर्जर बायां तट के टूटते रहने से किसानों के खेतों का पटवन बाधित हो जाता है. तीन दशक पहले खोदी गयी नहर का आज तक कायाकल्प नहीं हो सका है. गौरतलब है कि पिछले 38 सालों से दुर्गावती जलाशय परियोजना का इंतजार कर रहे कैमूर और रोहतास के पहाड़ी इलाकों के किसानों को जब दुर्गावती जलाशय का पानी मिलने का सिलसिला लगभग आठ वर्ष पूर्व शुरू हुआ, तो किसानों को लगा था कि अब उनके कुनबे का दिन भी फिरेगा और खेतों में उनके खून पसीने की कमाई लहलहायेगी. लंबा इंतजार किसानों को करना पड़ा. बावजूद इसके परियोजना की बायें तट नहर केनाल से किसानों के खेतों का पेट अब तक पूरी तरह नहीं भर सका है. खडीहा के किसान दीना यादव, रमावतपुर के किसान नरसिंग साह, राधाखांड के किसान शंभु सिंह, बखारबांध के किसान मोहन सिंह, बेल्डी के किसान किशुन पासवान, दवनपुर के किसान श्याम बिहारी चौधरी सहित तमाम किसानों का कहना है कि जलाशय की नहर पूरी तरह बर्बाद हो गयी है. हर वर्ष नहर का तट कभी पुनांव में तो कभी नवगढ़ में तो कभी हुडरी में टूट जाता है. गौरक्षणी से लेकर राधाखांड तक तो नहर, नहर की तरह दिखाई ही नहीं देता है. तटबंधों की मिट्टी बरसात में गिरकर नहर को ही भरने का काम करती है. मरम्मत के नाम पर विभाग द्वारा फिर मिट्टी निकलवायी जाती है और फिर यह मिट्टी नहर में गिर जाती है. कमजोर होने के कारण तटबंध ढह जाते हैं. इससे किसानों को कोई फायदा नहीं मिलता. जब तक नहर का पक्कीकरण नहीं होता तब तक पटवन की उम्मीद नहीं की जा सकती. किसानों के अनुसार इस नहर के भरोसे पानी न बरसे तो धान की खेती भी पार नहीं लगेगी. गेहूं के खेती के पानी के लिए तो बात करना ही बेकार है. = तीन दशक पहले खोदी गयी नहर का नहीं हुआ कायाकल्प दुर्गावती जलाशय का बायां तट नहर केनाल के बदहाल हालत को परियोजना से पिछले आठ वर्षों से नहर में पानी छोड़ने के बावजूद अब तक दुरूस्त नहीं किया जा सका है. नतीजा है तीन दशक पहले भितरीबांध-करमचट पहाड़ी से सटे रामपुर प्रखंड से लेकर भगवानपुर प्रखंड के सुवरन नदी तक जाने के लिए इस नहर की खुदाई करायी गयी थी. लेकिन, 22 किलोमीटर लंबा बायां तट नहर हर वर्ष जब जलाशय से खरीफ और रबी सीजन के पटवन के लिए पानी छोड़ा जाता है तो जगह-जगह से टूट जाता है. यही नहीं इस नहर के टेल क्षेत्र के लगभग 12 किलोमीटर बायें तट नहर का स्वरूप ही बदल कर नहर से नाला या छोटे गहरे खेत जैसा हो गया है. मरम्मत के अभाव में नहर के तटबंध तमाम जगहों पर टूट कर नहर के पेटी में मिल गये हैं. तटबंधों की यह मिट्टी बरसात में गिरकर नहर के पेटी को भरने का काम ही कर रही है. यानी पूरे 22 किलोमीटर पटवन के रेंज में मात्र 12-13 किलोमीटर तक यानी सोनांव-पुनांव गांव के किसानों को ही ठीक से नहर का पानी मिल पाता है. शेष 9-10 किलोमीटर के रेंज के किसानों के पटवन की जरूरत आज भी जर्जर नहर के कारण पूरा नहीं हो पा रही है. क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता इस संबंध में जब दुर्गावती जलाशय परियोजना के कार्यपालक अभियंता अखिलेश कुमार से बात की गयी, तो उनका कहना था कि बलुआ मिट्टी होने के कारण यह समस्या आ रही है. इसे लेकर विभाग अब तटबंधों को मजबूत बनाने के लिए पक्कीकरण का प्राक्कलन बना रहा है, जो सरकार को भेजा जायेगा. सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद तटबंधों पर काम लगाया जायेगा. उन्होंने यह भी बताया कि कहां पुलिया का अभाव या जरूरत है, पुलिया के निर्माण का निर्णय विभाग लेगा, हमलोग अगर पुलिया डैमेज है तो उसकी मरम्मत भर करा सकते हैं. इनसेट 1 नहर में पुलिया के अभाव से नहीं पहुंचता खेती का सामान भभुआ. दुर्गावती जलाशय परियोजना के नहर केनाल के पार करने के लिए कई जगह पुलिया नहीं दिये जाने से किसानों को कृषि सामग्री खेतों तक ले जाने में भी दिक्कत होती है. हालांकि, आने जाने के लिए किसान नहर के तटबंधों पर बिजली के खंभे आदि लगाकर काम चला ले जाते हैं. लेकिन अगर खेत में बीहन डालना हो या जुताई के लिए ट्रैक्टर ले जाना हो, तो किसानों को दूर स्थित किसी पुलिया के सहारे नहर पार करने के लिए चक्कर लगाना पड़ता है. रमावतपुर के गवलछनी टोला के किसान महेंद्र साह, रामलाल बिंद आदि का कहना है कि गांव के कई किसानों की खेती नहर के उस पार है. लेकिन गांव के सामने नहर पर कोई पुलिया नहीं दी गयी है. अगर कृषि सामग्री उधर ले जाना है तो किसानों को खडिहां गांव या फिर बड़वान घाट के सामने दी गयी पुलिया की सहायता लेनी पड़ती है. इसके चक्कर में खर्च और समय दोनों बढ़ जाता है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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