Kaimur Government Hospital Anesthetist Shortage : कैमूर जिले के मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी खामी सामने आई है. अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा लगभग ठप हो गई है. हालात ऐसे हैं कि रोजाना आने वाली कई गर्भवती महिलाओं को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी बोझ पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सिजेरियन की सुविधा शुरू होने के बाद काफी राहत मिली थी, लेकिन अब यह सुविधा बंद होने से मरीजों की परेशानी फिर से बढ़ गई है. दूर-दराज के गांवों से आने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं.
Kaimur News : एनेस्थेटिस्ट के तबादले के बाद बिगड़ी व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पहले एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में डॉ. संदीप की तैनाती थी. फरवरी महीने में उनके तबादले के बाद डॉ. संग्राम सिंह को प्रतिनियुक्त किया गया था. लेकिन कुछ समय बाद उनका भी ट्रांसफर हो गया, जिसके बाद से यह पद खाली पड़ा है.
एनेस्थेटिस्ट की अनुपस्थिति के कारण सिजेरियन ऑपरेशन करना संभव नहीं हो पा रहा है. जबकि अस्पताल में महिला डॉक्टर और एक जीएनएम को ऑपरेशन के लिए जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन बिना एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के यह व्यवस्था पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है.
Mohania Hospital : पांच प्रखंडों के मरीज होते थे लाभान्वित
मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में सिजेरियन सुविधा शुरू होने के बाद आसपास के पांच प्रखंडों से मरीज यहां इलाज के लिए आने लगे थे. इससे पहले लोगों को जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था.
सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मिलने से गरीब परिवारों को काफी राहत मिली थी. लेकिन अब सुविधा बाधित होने के कारण फिर से वही पुरानी स्थिति बन गई है, जहां मरीजों को महंगा इलाज कराना मजबूरी बन गया है.
Cesarean Service Shortage : अक्टूबर 2024 में हुई थी शुरुआत
अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन की शुरुआत 3 अक्टूबर 2024 को हुई थी. उद्घाटन के दिन रामगढ़ की एक महिला का सफल ऑपरेशन किया गया था. इस दौरान स्थानीय विधायक संगीता कुमारी समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद थे.
उस समय इसे इलाके के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था, लेकिन कुछ ही महीनों में यह व्यवस्था कमजोर पड़ गई और अब पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है.
अस्पताल प्रशासन ने मानी समस्या
इस मामले में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अभिनाश कुमार ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के बाद अब तक केवल दो सिजेरियन ऑपरेशन ही हो पाए हैं. उन्होंने साफ कहा कि नियमित एनेस्थेटिस्ट की उपलब्धता नहीं होने के कारण यह सेवा बाधित हो रही है.
उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग से लगातार एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की मांग की जा रही है, ताकि सिजेरियन सेवा को फिर से सुचारु किया जा सके.
गरीब मरीजों पर बढ़ा दबाव
अस्पताल में सुविधा ठप होने का सबसे ज्यादा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है. जिन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है. कई परिवारों के लिए यह खर्च उठाना बेहद मुश्किल हो रहा है.
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट की स्थायी तैनाती की जाए.
समाधान की उम्मीद, लेकिन इंतजार जारी
फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है और मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. अगर जल्द ही एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं की गई, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है.
