मोहनिया शहर. मुंगेर में ड्यूटी में तैनात एएसआइ संतोष कुमार पर हमले के बाद उनकी मौत हो गयी, जिसकी सूचना शनिवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव मोहनिया थाना क्षेत्र स्थित पिपरिया गांव पहुंची, तो गांव में सन्नाटा पसर गया. मृतक एएसआइ पिपरिया गांव के स्वर्गीय दिनेश्वर सिंह के 43 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार बताये जाते हैं. जानकारी के अनुसार, मुंगेर जिले में 112 पुलिस वाहन पर वह तैनात थे, जहां दो पक्षों के बीच झड़प का विवाद सुलझाने गये थे. इसी दौरान उनपर धारदार हथियार से हमले से वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे. उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच पहुंचाया गया था. लेकिन, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. इसकी सूचना जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, तो उनके शुभचिंतक मित्र आदि के साथ-साथ परिवार वालों में मातमी सन्नाटा पसर गया. लोगों ने बताया कि वे काफी मिलनसार व अच्छे व्यक्ति थे. मृतक संतोष दो भाई थे. इसमें संतोष बड़े थे, तो अभय सिंह छोटे है. अभय ट्रक मैकेनिक हैं. उनके शव के अंतिम संस्कार में पटना से भी कई लोग शामिल होने गांव पहुंचे थे. # आठ वर्षीय पुत्र के सिर से उठा पिता का साया मृतक एएसआइ संतोष के माता-पिता की पहले ही मौत हो गयी थी. संतोष पत्नी और बेटे के साथ पटना में रहते थे और गांव पर ताला बंद रहता है. संतोष अपने पीछे एक आठ वर्षीय पुत्र कन्हैया कुमार व पत्नी अंजू देवी को छोड़ गये हैं, जिनका रो-रो कर बुरा है. बताया जाता है कि अभी हाल ही में आठ मार्च को अपने दादा लाल साहब सिंह की 13वीं में गांव आये थे. उस समय अपने मित्रों और परिवार के साथ मिले थे. लेकिन क्या पता था कि आठ मार्च को गांव आना अब जिंदगी का आखिरी दिन होगा. #चचेरा भाई की भी ड्यूटी के दौरान हो गयी थी मौत मृतक संतोष के करीबी मित्र जियुत सिंह ने बताया 2007 बैच के सिपाही थे, जो एक वर्ष पहले ही एएसआइ बने थे. इनके चचेरा भाई भी एसएसबी में थे, जिनकी मौत ड्यूटी के दौरान हो गयी थी. संतोष की मुंगेर में पोस्टिंग थी. वहां पर ड्यूटी के दौरान हमला होने के बाद उनको इलाज के लिए पीएमसीएच लाया गया, जहां की उनकी मृत्यु हो गयी. वह हमारे बचपन के बेस्ट फ्रेंड थे, उनकी नौकरी आज के 18 साल पहले पुलिस में हुई थी. उनकी करीब 17 वर्ष अभी नौकरी बाकी थी. हम सरकार से यही चाहेंगे कि उनके परिवार को किसी तरह का कष्ट ना हो, उनके परिवार के बारे में प्रशासन विचार करे. जबकि, मृतक के चाचा गुप्तेश्वर सिंह ने बताया हमें सुबह तीन बजे हमले में घायल होने की जानकारी मिली, जहां जानकारी दी गयी है कि खून की कमी हो गयी है, तो हम बताये की खून ब्लड बैंक से मिल जायेगा. लेकिन कुछ देर बाद ही जानकारी मिली कि उनकी मौत हो गयी है. हम सरकार से चाहते हैं कि जो भी मुआवजा है परिजनों को सहूलियत से मिल जाये और बच्चा अभी छोटा है जब बड़ा हो जाये तो उसे नौकरी दी जाये.
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