रमजान के तीसरे जुमे पर नमाज के लिए मस्जिदों में उमड़े रोजेदार

ईदगाह, जुमा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज पर रही भीड़

= ईदगाह, जुमा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज पर रही भीड़ भभुआ सदर. शहर सहित जिलेभर में माह-ए-रमजान का तीसरा जुमा शुक्रवार को एहतराम व अकीदत के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रमजान के तीसरे जुमे की नमाज अदा की गयी. शहर के ईदगाह मस्जिद, जुमा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ रही. इस मौके पर सभी अकीदतमंदों ने अल्लाह से बरकत के साथ ही अमन-चौन की दुआएं मांगी. स्टेडियम गेट के समीप स्थित ईदगाह मस्जिद में मौलाना मोहसिन रजा के जेरे इमामत में तीसरे जुमे की नमाज अदा की गयी. नमाज के बाद मस्जिदों में मौलाना ने रोजेदारों को अल्लाह के पवित्र माह रमजान में जुमे की विशेषता बतायी. साथ ही उन्होंने राजेदारों को इस माह की पवित्रता बनाये रखने की सीख दी. तीसरे जुमे पर शाम को कई मस्जिदों में इफ्तार भी रखा गया. = रहमतों व बरकतों का महीना है रमजान रमजान रहमतों व बरकतों वाला महीना होता है, जिसमें अल्लाह शैतान को कैद कर देता है, ताकि शैतान लोगों की इबादत में खलल न डाले. ईदगाह मस्जिद के माैलाना मोहसिन रजा कहते हैं कि, रमजान-उल-मुबारक में हर नेकी का सवाब सत्तर गुना कर दिया जाता है. हर नवाफिल का सवाब सुन्नतों के बराबर व हर सुन्नत का सवाब फर्ज के बराबर कर दिया जाता है. इस तरह सभी फर्ज का सवाब सत्तर गुना कर दिया जाता है. हाफिज अलीम के मुताबिक, इस माहे-मुबारक में अल्लाह की रहमत खुलकर अपने बंदो पर बरसती है. रमजान में ही पाक कुरआन शरीफ उतारा गया. हजरत मुहम्मद पैगंबर रमजान में अपनी इबादत बढ़ा दिया करते थे. हालांकि अल्लाह के रसूल पैगंबर साहब बख्शे-बख्शाए थे, लेकिन वे दिन भर रोजा रखते व रात भर इबादत में गुजारते थे. उन्होंने कहा कि रमजान के पहले अशरे में अल्लाह की रहमत के लिए ज्यादा से ज्यादा इबादत की जानी चाहिए. = 11 मार्च से होगी तीसरे अशरे की शुरुआत मुस्लिम जानकार और ईदगाह मस्जिद के खजांची व सेक्रेटरी इकराम अली व असलम अंसारी ने बताया कि रमजान मुबारक को तीन अशरों में बांटा गया है और एक अशरा दस दिनों का होता है. दूसरा अशरा खत्म होने को है और अब 11 मार्च से तीसरा अशरा शुरू होगा. तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है. तीसरे अशरे के पूरे होते ही रमजान मुबारक को अलविदा कहने का वक्त आ जायेगा. इसी अशरे में अलविदा की नमाज होती है. एकराम अली ने बताया कि इस बार अगर 29 रोजा होता है, तो अलविदा की नमाज 13 मार्च को पढ़ी जायेगी और अगर रोजा 30 दिनों का होता है तो अलविदा की नमाज 20 मार्च को पढ़ी जायेगी.

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Author: VIKASH KUMAR

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