Kaimur News : कैमूर जिले का कुदरा देश और प्रदेश में उच्च कोटि के चावल उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां संचालित चार सौ से अधिक छोटी-बड़ी चावल मिलों के कारोबार पर पिछले तीन वर्षों से रेलवे ओवरब्रिज पर लगे ओवरहेड बैरियर ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. बड़े व्यावसायिक वाहनों का आरओबी से परिचालन बंद होने के कारण मिलों तक धान पहुंचाने और तैयार चावल बाहर भेजने में परेशानी हो रही है. इसका सीधा असर चावल कारोबार के साथ मिलों में काम करने वाले हजारों मजदूरों पर भी पड़ रहा है.
तीन साल से बैरियर, अब बंदी के कगार पर मिलें
मिलरों का कहना है कि आरओबी की रिपेयरिंग के लिए करीब तीन वर्ष पहले ओवरहेड बैरियर लगाया गया था. इसके बाद से इस मार्ग पर बड़े व्यावसायिक वाहनों का परिचालन बंद है. कुदरा की अधिकांश चावल मिलें रेलवे लाइन के उत्तर दिशा में स्थित हैं. ऐसे में भारी वाहनों के नहीं पहुंचने से मिलों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है. कई मिलें बंद होने के कगार पर पहुंच गयी हैं.
प्रशासन से लेकर सांसद-विधायक तक लगायी गुहार
बैरियर हटाने की मांग को लेकर मिलरों ने कई बार आंदोलन किया. इसके बाद रेलवे के डीआरएम, जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों से मिलकर समस्या का समाधान कराने की मांग की गयी. जब अधिकारियों से राहत नहीं मिली, तो मिलर सांसद, विधायक और मंत्री तक अपनी समस्या लेकर पहुंचे. इसके बावजूद अब तक आरओबी से बैरियर हटाने या बड़े वाहनों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है.
ग्रामीण सड़कों के सहारे चल रहा कारोबार
बैरियर के कारण कुछ मिलर ग्रामीण सड़कों के माध्यम से छोटे वाहनों से किसी तरह अपना कारोबार चला रहे हैं. लेकिन छोटे वाहनों से सीमित मात्रा में धान और चावल की ढुलाई होने के कारण लागत बढ़ रही है और कारोबार करना मुश्किल हो गया है. मिलरों को उम्मीद थी कि इस वर्ष धान की फसल तैयार होने से पहले प्रशासन बैरियर हटा देगा या फिर भारी वाहनों के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करेगा. लेकिन अब तक ऐसा नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ गयी है.
धान की फसल तैयार होने से पहले बढ़ी चिंता
कुछ ही महीनों में खेतों में धान की फसल तैयार होने लगेगी. इसके बाद बड़ी मात्रा में धान मिलों तक पहुंचेगा और चावल की ढुलाई भी बढ़ेगी. ऐसे में अगर आरओबी से बड़े वाहनों का परिचालन शुरू नहीं हुआ, तो चावल उद्योग पर संकट और गहरा सकता है. मिलरों का कहना है कि इस समस्या का तत्काल समाधान नहीं हुआ तो कई और मिलें बंद हो सकती हैं.
मिलों में काम नहीं, दूसरे राज्यों की ओर मजदूरों का पलायन
चावल मिलों की खराब स्थिति का असर यहां काम करने वाले मजदूरों पर भी पड़ रहा है. कुदरा क्षेत्र की सैकड़ों मिलों में कभी हजारों मजदूर काम करते थे. लेकिन मिलों में उत्पादन और कारोबार प्रभावित होने के कारण मजदूरों को नियमित काम नहीं मिल पा रहा है. कई मजदूर अब दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं.
मजदूरों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से मिलों में पहले की तरह काम नहीं मिल रहा है. इससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. इस वर्ष भी बैरियर हटने की उम्मीद कमजोर नजर आ रही है, ऐसे में उन्हें रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है.
मिलरों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार तीन वर्षों से समस्या का समाधान नहीं होने से मिलरों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है. मिलरों का कहना है कि कुदरा की पहचान चावल उद्योग से है और इस उद्योग को बचाने के लिए आरओबी पर लगे ओवरहेड बैरियर का समाधान जरूरी है. धान की नयी फसल बाजार में आने से पहले अगर बैरियर नहीं हटाया गया, तो इसका असर पूरे चावल कारोबार, मजदूरों के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
