= 21 वर्ष से फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे शिक्षक पर कसा शिकंजा = हाइकोर्ट के आदेश पर निगरानी विभाग ने दर्ज करायी प्राथमिकी = प्रमाणपत्र सत्यापन में फर्जीवाड़ा उजागर, चैनपुर थाने में दिया गया आवेदन = बर्खास्तगी और वेतन रिकवरी की तैयारी में जुटा विभाग = दो दर्जन से अधिक शिक्षकों पर दर्ज हो चुकी है अब तक प्राथमिकी = 100 से अधिक शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र, 400 का फोल्डर फाइल अब भी लंबित भभुआ नगर. फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर वर्षों से नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई अब तेज हो गयी है. उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में चल रही जांच के दौरान एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 21 वर्षों से फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर वेतन उठा रहे एक नियोजित पंचायत शिक्षक पर निगरानी विभाग ने शिकंजा कसा है. मामले में निगरानी विभाग के अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक ने चैनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है. निगरानी विभाग द्वारा थाने में दिये गये आवेदन में बताया गया है कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिले के पंचायत शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है. इसी क्रम में प्राथमिक विद्यालय डीह गुलरिया में कार्यरत नियोजित पंचायत शिक्षक सत्येंद्र नाथ के प्रमाण पत्रों की जांच की गयी, जांच के दौरान जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराये गये फोल्डर फाइल में मौजूद कागजात का सत्यापन कराया गया. जांच के दौरान संबंधित बोर्ड से प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया गया, जिसमें शिक्षक सत्येंद्र नाथ का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया. बोर्ड द्वारा प्रमाणपत्र को अवैध घोषित किये जाने के बाद निगरानी विभाग ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए चैनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है. मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है. विभागीय सूत्रों के अनुसार फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षक के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इसके साथ ही इतने वर्षों में लिए गये वेतन के रिकवरी की भी तैयारी की जा रही है. गौरतलब है कि जिले में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है. अब तक दो दर्जन से अधिक ऐसे शिक्षकों के खिलाफ विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, वहीं कई मामलों में जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले में शिक्षकों के फोल्डर फाइल की जांच निगरानी विभाग द्वारा तेज कर दी गयी है. इस कार्रवाई के दौरान अब तक 100 से अधिक शिक्षकों ने त्यागपत्र दे दिया है. हालांकि, विभागीय आदेश के बावजूद अभी भी 400 से अधिक शिक्षकों के फोल्डर फाइल संबंधित कार्यालयों द्वारा उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. = धीमी जांच से उठ रहे सवाल निगरानी विभाग द्वारा कागजातों की जांच धीमी गति से होने के कारण कई फर्जी शिक्षक अब भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसे लेकर शिक्षा विभाग और जांच प्रक्रिया पर कई सवाल भी उठ रहे हैं. इध,र इस संबंध में पूछे जाने पर डीपीओ स्थापना शंभू कुमार सिंह ने बताया कि थाने में निगरानी विभाग द्वारा एफआइआर दर्ज करने के बाद विभाग द्वारा फर्जी शिक्षक को पदमुक्त करते हुए वेतन रिकवरी के लिए कार्रवाई की जायेगी.
बुरे फंसे गुरुजी, फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रहे डीह गुलरिया के शिक्षक पर प्राथमिक दर्ज
= 21 वर्ष से फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे शिक्षक पर कसा शिकंजा
