जिला बनने के 33 साल बाद भी केवल भभुआ व मोहनिया में ही सिजेरियन की सुविधा

जिले में महज 11 महिला डॉक्टरों के भरोसे 7.80 लाख महिलाओं के इलाज की जिम्मेदारी

जिले में महज 11 महिला डॉक्टरों के भरोसे 7.80 लाख महिलाओं के इलाज की जिम्मेदारी =महिला सर्जन के कमी से केवल सदर अस्पताल व अनुमंडलीय अस्पताल मोहनिया में हो रहा सिजेरियन =जिले के अधिकतर सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव से होती है दिक्कत, मरीज होते है परेशान भभुआ सदर. भगवानपुर के पतरीहा गांव के रहनेवाले लालबाबू चौधरी की गर्भवती पत्नी लक्ष्मीना देवी की शनिवार रात अचानक तबीयत खराब हो गयी. इसकी वजह से परिजन उसे लेकर भगवानपुर पीएचसी आये, लेकिन यहां महिला डॉक्टर के नहीं रहने से लक्ष्मीना देवी की जांच पड़ताल नहीं हो सकी. इसके चलते गर्भवती महिला को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल लाना पड़ा. यहां सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा होने से गर्भवती महिला का ऑपरेशन से प्रसव कराया गया. दरअसल, कैमूर को जिला बने 33 साल हो गया, लेकिन इतने साल बाद भी भभुआ सदर अस्पताल और मोहनिया स्थित अनुमंडलीय अस्पताल को छोड़ दें तो रामगढ़ रेफरल अस्पताल सहित किसी भी सीएचसी और स्वास्थ्य संस्थान में जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा नहीं है. सिजेरियन की जरूरत पड़ने पर मरीज को भभुआ सदर अस्पताल या फिर मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल ले जाना पड़ता है. वहीं, सिजेरियन ऑपरेशन के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2025 से लेकर मार्च 2026 तक भभुआ सदर अस्पताल में महिला डॉक्टरों ने 1488 गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया, तो उधर इसी अवधि में मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में 181 गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया. यानी कुल 1669 गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया. इस साल जनवरी के महीने में ही सदर अस्पताल में 150 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, तो मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में 20 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया. महिला और शिशु रोग विशेषज्ञ की भी है भारी कमी इधर, एक केवल भगवानपुर सीएचसी ही महिला डॉक्टर की कमी नहीं झेल रहा, बल्कि सदर अस्पताल, चांद, चैनपुर, दुर्गावती, नुआंव, मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल और कुदरा को छोड़ दे तो अन्य किसी भी सीएचसी या एपीएचसी में महिला डॉक्टर तैनात नहीं है. कुछ ऐसा ही हाल शिशु रोग डॉक्टरों का भी है और भभुआ सदर अस्पताल व मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल के अलावा कहीं भी बच्चों के डॉक्टर पदस्थापित नहीं है. जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थापित अधिकतर सीएचसी में महिला और बाल रोग संबंधित डॉक्टर पदस्थापित नहीं किये जा सके है या पदस्थापित है भी तो गायब है या लंबी छुट्टी पर है. कुल मिलाकर जिले में महज 11 महिला डॉक्टरों के भरोसे 7.80 लाख महिलाओं के इलाज की जिम्मेदारी है. गौरतलब है कि जिले के भगवानपुर, नुआंव, रामगढ़, रामपुर और सुदूर जंगली इलाके अधौरा के अस्पतालों में महिला डाॅक्टर नहीं हैं. अब ऐसे में इन प्रखंडों की महिलाओं और गर्भवतियों को इलाज के लिए भभुआ सदर अस्पताल या फिर मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल आना पड़ता है या फिर महिला डॉक्टर के अभाव में जीएनएम या एएनएम से उन्हें स्वास्थ्य जांच सहित महिलाओं का प्रशव करवाना पड़ता है. =सदर अस्पताल सहित 11 संस्थानों में महिला डॉक्टर है तैनात जिले में सदर अस्पताल व मोहनिया अनुमंडल अस्पताल सहित पांच अस्पतालों में 11 महिला डॉक्टर तैनात है. इनमें सदर अस्पताल में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ किरण सिंह, डॉ मधु यादव और डॉ मनीषा नारायण, मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल व सीएचसी में महिला डॉ कनक लता, डॉ अंबर, डॉ शान्या, चांद सीएचसी में डॉ इंदु प्रियदर्शनी, कुदरा सीएचसी में महिला डॉक्टर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रीता सिंह व डॉ अन्नू कुमारी और दुर्गावती सीएचसी में डॉ संगीता सिन्हा पदस्थापित हैं. जबकि, जिले के चैनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डाॅक्टर प्रीति कुमारी कार्यरत हैं. =बोले सीएस जिले के अधिकतर सीएचसी पर महिला रोग से संबधित डॉक्टर के नहीं होने के सवाल पर सिविल सर्जन डॉ चंदेश्वरी रजक ने बताया किजिले में महिला डॉक्टरों की कमी है. इसके चलते हरेक सीएचसी पर महिला रोग से जुड़े डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पा रही है. महिला डॉक्टर की कमी के लिए विभाग से पत्राचार किया गया है.

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By VIKASH KUMAR

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