Kaimur News: कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड स्थित लोहंदी करर मध्य विद्यालय में भूत-प्रेत की अफवाह का असर 19वें दिन भी खत्म नहीं हुआ. गुरुवार को भी शिक्षक पूरे समय बच्चों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन एक भी छात्र-छात्रा पढ़ाई के लिए विद्यालय नहीं पहुंचा. लगातार प्रयासों के बावजूद बच्चों की विद्यालय वापसी नहीं होने पर शिक्षा विभाग ने अब वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया है. जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक गांव में किसी उपयुक्त भवन को चिन्हित कर वहीं बच्चों की कक्षाएं संचालित की जायेंगी.
तीन छात्राओं के बेहोश होने के बाद फैली अफवाह
करीब 19 दिन पहले विद्यालय में तीन छात्राओं के अचानक बेहोश होने की घटना हुई थी. इसके बाद गांव में भूत-प्रेत की अफवाह फैल गयी और बच्चों व अभिभावकों के बीच डर का माहौल बन गया. कुछ स्थानीय लोगों और ओझा की ओर से भूत-प्रेत की बात कहे जाने के बाद अफवाह और तेजी से फैल गयी. इसका सीधा असर विद्यालय की उपस्थिति पर पड़ा और छात्र-छात्राओं ने स्कूल जाना लगभग बंद कर दिया.
समझाइश के बाद भी नहीं टूटा बच्चों का डर
घटना के बाद शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव पहुंचती रहीं. अधिकारियों ने अभिभावकों से बातचीत कर बच्चों को विद्यालय भेजने की अपील की. मनोचिकित्सकों की टीम ने भी बच्चों और ग्रामीणों को समझाया कि बेहोश होने की घटना का भूत-प्रेत से कोई संबंध नहीं है और अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए. विशेष प्रयास के बाद एक दिन कुछ बच्चे विद्यालय पहुंचे, लेकिन उसी दौरान एक छात्रा के फिर बेहोश होने से वे घबरा गये और स्कूल से निकल गये. इसके बाद बच्चों ने दोबारा विद्यालय आने की हिम्मत नहीं जुटायी.
पढ़ाई बचाने के लिए गांव में चलेगी कक्षा
लगातार बच्चों की अनुपस्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब विद्यालय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का फैसला लिया है. गांव के भीतर किसी सुरक्षित और उपयुक्त भवन को चिन्हित कर वहां कक्षाएं संचालित की जायेंगी. शिक्षक नियमित रूप से वहां पहुंचकर बच्चों को पढ़ायेंगे. विभाग का उद्देश्य है कि विद्यालय भवन को लेकर बच्चों के मन में बना डर दूर होने तक उनकी पढ़ाई बाधित न हो और शैक्षणिक गतिविधियां जारी रहें.
डर खत्म होते ही स्कूल भवन में लौटेगी पढ़ाई
प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी शंभू कुमार सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से लगातार प्रयास किये गये, लेकिन बच्चे विद्यालय आने को तैयार नहीं हैं. इसलिए कुछ दिनों तक गांव में ही एक भवन चिन्हित कर विद्यालय का संचालन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना विभाग की प्राथमिकता है. स्थिति सामान्य होने और बच्चों व अभिभावकों का डर खत्म होने के बाद कक्षाएं फिर से विद्यालय भवन में संचालित की जायेंगी. प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों के बीच जागरूकता और समझाइश का प्रयास भी जारी रहेगा.
