Kaimur News : जिले में पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण स्थानीय नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है. संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम कैमूर पहुंच चुकी है. वहीं संवेदनशील और अतिसंवेदनशील स्थलों पर पानी के रिसाव एवं कटाव को रोकने के लिए सतत निगरानी शुरू कर दी गयी है.
डीएम ने बाढ़ नियंत्रण को लेकर की विस्तृत समीक्षा
गुरुवार को जिलाधिकारी कैमूर कुमार अनुराग ने जिला समाहरणालय में बाढ़ नियंत्रण, जल प्रबंधन, तटबंधों एवं सुरक्षात्मक संरचनाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की. इस दौरान दुर्गावती जलाशय परियोजना के तहत संचालित उपचारात्मक एवं सुरक्षात्मक कार्यों की अद्यतन स्थिति की भी जानकारी ली गयी.
सभी संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का निर्देश
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील तटबंधों, गाइड बांधों तथा अन्य सुरक्षात्मक संरचनाओं की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने संबंधित अभियंताओं को संवेदनशील स्थलों पर नियमित रूप से उपस्थित रहने और लगातार क्षेत्र भ्रमण करने को कहा, ताकि किसी भी संभावित रिसाव या कटाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके.
आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की ली जानकारी
प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन शाखा ने संभावित बाढ़ एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए की गयी पूर्व तैयारियों की विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी को दी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में सूचना के आदान-प्रदान में देरी नहीं होनी चाहिए और जल संसाधन विभाग तथा आपदा प्रबंधन शाखा के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए.
पानी का बहाव घट रहा, जल्द सामान्य होगी स्थिति
बैठक में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल और दुर्गावती जलाशय परियोजना के अभियंताओं ने बताया कि पानी का बहाव लगातार घट रहा है. अनुमान है कि एक दिन के अंदर स्थिति सामान्य हो सकती है. इसके बावजूद प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता है और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है.
एसडीआरएफ की टीम आपात स्थिति के लिए तैयार
अधिकारियों ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम को बुला लिया गया है. टीम किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. जिलाधिकारी ने प्रशासनिक, तकनीकी और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया. आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू करने को भी कहा गया.
10 हजार बालू की बोरियों का स्टॉक, 12 नावों की व्यवस्था
जिले में पहाड़ी झरनों के मुंह खुलने तथा दुर्गावती, सुवर्णा, गेहुअनवां, कुहिरा और कर्मनाशा नदियों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की गयी हैं. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए करीब 10 हजार बालू भरी बोरियों का स्टॉक रखा गया है.
जलभराव एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और बचाव कार्य के लिए 12 नावों के साथ एकरारनामा किया गया है. इसके अलावा 615 पॉलिथीन शीट्स, 29 लाइफ जैकेट और एक महाजाल की व्यवस्था भी रखी गयी है. बचाव कार्य के लिए 19 कुशल गोताखोरों को चिन्हित कर सूचीबद्ध किया गया है.
प्रभारी आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने बताया कि उपलब्ध मानव बल, तकनीकी संसाधनों और राहत सामग्रियों का आवश्यकता के अनुसार जमीनी स्तर पर उपयोग किया जा रहा है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में आमजनों और प्रभावित लोगों तक तत्काल प्रभावी सहायता पहुंचायी जा सके.
