Kaimur News : सरदार वल्लभभाई पटेल महाविद्यालय, भभुआ के बाबू गुप्तनाध सभागार में गुरुवार को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के अवसर पर जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गयी. ‘आत्म दीपो भव आनंद क्लब’ के निर्देशन में मनोविज्ञान एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की इस वर्ष की विषयवस्तु ‘जागरूकता, संवेदना, सहयोग, जीवन’ रही.
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन और कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई. छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. डॉ. सीमा सिंह ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस वर्ष की विषयवस्तु ‘आत्महत्या के प्रति सोच बदलना’ पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानियों को चुप्पी में दबाने के बजाय मित्रों, परिवार या विश्वसनीय लोगों के साथ साझा करना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए केंद्र सरकार की दूरभाष आधारित ‘टेली-मानस’ सेवा सहित अन्य उपयोगी माध्यमों की जानकारी भी दी गयी.
मनोनाट्य के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को किया उजागर
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोनाट्य रहा. इसमें कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं, पढ़ाई और रोजगार की चिंता से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया. मनोनाट्य के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, परिवार और जीवन के बीच संतुलन बनाये रखने का संदेश दिया गया.
प्रधानाचार्य डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी दौर में बढ़ते असंतोष के कारण व्यक्ति नकारात्मक विचारों की ओर बढ़ सकता है. उन्होंने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और महापुरुषों की जीवनियों से प्रेरणा लेकर आत्मबल बढ़ाने पर जोर दिया.
सकारात्मक सोच और असफलता से सीखने पर दिया जोर
डॉ. महेश प्रसाद ने मन की स्थिरता एवं सकारात्मक सोच पर विचार रखे. डॉ. अन्नपूर्णा गुप्ता ने असफलता को स्वीकार कर निरंतर प्रयास करने की बात कही. डॉ. सोनल ने आत्म-तुलना से बचने और जीवन में संतुलन स्थापित करने पर जोर दिया. डॉ. नेयाज अहमद सिद्दीकी ने समस्याओं के कारणों को समझकर समाधान तलाशने, जबकि डॉ. भूपेंद्र शुक्ल ने यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी.
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विद्यार्थियों ने संवाद को बताया जीवन बचाने का माध्यम
संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने भी अपने विचार रखे. अलका पटेल ने आत्महत्या के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक मृत्यु के पीछे कई अनकहे दर्द छिपे हो सकते हैं. असरा करीम ने कहा कि असफलता के बाद दोबारा प्रयास कर सफलता हासिल की जा सकती है, लेकिन जीवन समाप्त होने के बाद अवसर नहीं मिलता.
चांदनी कुमारी ने ऐसा वातावरण बनाने पर जोर दिया, जिसमें व्यक्ति अपने विचार बेझिझक व्यक्त कर सके. विक्की कुमार ने जीवन बचाने के लिए संवाद स्थापित करने को आवश्यक बताया. डॉ. विशाल ने सामाजिक एवं आर्थिक असमानता, कुरीतियों और विषमताओं को भी आत्महत्या जैसी घटनाओं का एक कारण बताते हुए सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत बतायी.
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विद्यार्थियों को दिलायी गयी आत्महत्या निवारण की शपथ
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सीमा सिंह ने उपस्थित प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को आत्महत्या निवारण की सामूहिक शपथ दिलायी. मनोनाट्य में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कीर्तिका, आयुष, चांदनी, नेहा, आरती, विक्की, रंजन, कृष्णा सहित अन्य प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
इसके बाद बिहार गीत प्रस्तुत किया गया. विद्यार्थियों ने प्राध्यापकों के निर्देशन में जागरूकता रैली भी निकाली. कार्यक्रम में 100 से अधिक विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की.
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