रमजान के चलते सेवइयों व खजूर की मांग बढ़ी

बाजारों में बिखरी त्योहार की रौनक, फलों की भी बिक्री तेज

बाजारों में बिखरी त्योहार की रौनक, फलों की भी बिक्री तेज फोटो भभुआ सदर. जन्नत के दरवाजे खोलने वाला पाक माह रमजान अब अपने शबाब पर है, इसी के साथ बाजारों में त्योहार की रंगीनियत भी बिखरने लगी है. शहर के बड़े बाजार से लेकर छोटी दुकानों तक में खाने-पीने की सामग्री, तरह-तरह के फलों की खेप, सेवइयां, सूखे मेवे आदि सजे हैं और रोजेदार इनकी खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. इसमें सबसे खास है मीठा और ताकत से भरपूर खजूर. दिनभर रोजा रखकर इबादत करने वाले रोजेदार शाम को खजूर खाकर ही इफ्तार की शुरुआत करते हैं. शहर के फल व सेवई विक्रेता नौशाद बताते हैं बाजार में रमजान के समय हर एक दुकान पर 20 से 50 किलो तक सेवई की बिक्री हो जाती है, जिसमे सादी सेवई, बनारसी सेवई, किमामी सेवई और वारसी सेवई शामिल है, जिनकी कीमतें 50 से 120 रुपये किलो तक है. पश्चिम बाजार के मो शहीद बताते हैं कि रमजान शुरू होते ही खजूर की मांग बढ़ जाती है. शहर के फल विक्रेताओं के अनुसार वैसे तो खजूर की सैकड़ों किस्में होती है. बाजार में शबानी, खुबानी, कश, हयात, मगरूम, सगई जैसी कई किस्में मौजूद है, लेकिन सबसे अधिक मांग अरबी खजूर की होती है. ईरानी खजूर की भी अच्छी बिक्री होती है. बड़ी मस्जिद के मौलवी बताते हैं कि रमजान के महीने में पूरा एक महीना तक रोजा रखने के बहुत अधिक फजीलत यानी प्रधानता हैं. इनसेट अकीदत से रख रहे रोजा, गूंज रही तिलावत की सदाएं भभुआ सदर. सोलह दिनों के बाद माह-ए-रमजान अब अपने शबाब पर आना शुरू हो गया है और पूरे दिन रोजा रखने के बाद शाम होते ही मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ जुटने लग रही है. मगरिब की आजान होते ही लोग रोजा खोल रहे है. इसमें बड़ों के साथ बच्चों की भी तादाद रह रही है. शुक्रवार को ब्लॉक मोड़ स्थित ईदगाह मस्जिद में देर शाम इफ्तार के बाद मुस्लिम लोगों ने नमाज अदा की और फिर अल्लाह की बारगाह में झुक गये व गुनाहों की माफी मांगी. कहा भी जाता है कि माह-ए-रमजान में सवाब का दर्जा अन्य दिनों के मुकाबले 70 गुना ज्यादा होता है. मौलाना मोहसिन रजा के अनुसार माह-ए-रमजान बड़ा ही पाक व बरकतों वाला महीना होता है.

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By VIKASH KUMAR

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