Kaimur News : हल्की बारिश के बाद ही गोरिया नदी के उफान पर आने से चंदेश छलका पर करीब दो फीट तेज जलधारा बहने लगी है. इससे छलका होकर आवागमन करने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. सबसे ज्यादा परेशानी बाइक सवारों को हो रही है. तेज बहाव के बीच लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में आवागमन की समस्या हर साल गंभीर हो जाती है.
चार पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण प्रभावित
गोरिया नदी पर पुल नहीं होने का सीधा असर नुआंव प्रखंड की चंदेश, कोटा, दुमदुमा और मुखराव पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों पर पड़ रहा है. बरसात में चंदेश छलका पर पानी बढ़ जाने के बाद ग्रामीणों को रामगढ़ बाजार पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में लोग एवती गांव होते हुए नुआंव बाजार के रास्ते रामगढ़ पहुंचते हैं. पानी कम होने पर ही चंदेश छलका से सीधे आवागमन संभव हो पाता है.
हल्की बारिश में डूब जाती है किसानों की महीनों की मेहनत
गोरिया नदी के तटीय क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने का असर किसानों पर भी पड़ रहा है. हर वर्ष धान की रोपनी के बाद हल्की बारिश में नदी उफान पर आ जाती है. इससे नदी किनारे की सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न हो जाती है. चंदेश के किसान रविशंकर राय उर्फ टिंकू ने बताया कि नदी के करीब चार किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में दर्जनों किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बरसात में बार-बार पानी की चपेट में आती है. इससे किसानों की महीनों की मेहनत के साथ खेती में लगा पैसा भी डूब जाता है.
रामगढ़ की तीन पंचायतों पर भी पड़ता है असर
गोरिया नदी की समस्या केवल नुआंव प्रखंड तक सीमित नहीं है. रामगढ़ प्रखंड की तीन पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण भी बरसात में प्रभावित होते हैं. ग्रामीणों को कोचस बाजार जाने के लिए करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर मोहनियां के रास्ते जाना पड़ता है. इससे समय के साथ ईंधन का खर्च भी बढ़ जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि चंदेश छलका पर ऊंचाई वाला छोटा पुल बना दिया जाए या नदी की पर्याप्त खुदाई करा दी जाए, तो बरसात के दौरान पानी पुल के नीचे से आसानी से निकल सकेगा और आवागमन बाधित नहीं होगा.
मापी के बाद भी वर्षों से पुल का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व स्थानीय विधायक की पहल पर गोरिया नदी पर बड़े पुल के निर्माण का प्रस्ताव विभाग के संज्ञान में लाया गया था. इसके बाद अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर मापी भी की और रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी गयी. इसके बावजूद अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
कलानी बाजार के कारोबार पर भी पड़ता है असर
कलानी के समाजसेवी गोलू जायसवाल ने बताया कि बरसात में चंदेश छलका पर पानी आने के बाद दोनों प्रखंडों को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग प्रभावित हो जाता है. इसका सीधा असर कलानी बाजार के कारोबार पर भी पड़ता है. ग्रामीणों ने विभाग और प्रशासन से चंदेश छलका पर जल्द ऊंचे पुल का निर्माण कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से आवागमन की समस्या दूर होने के साथ किसानों की फसल और स्थानीय व्यापार को भी राहत मिलेगी.
