Kaimur News : एक अप्रैल को नहाय खाय के साथ शुरू होगा चैती छठ का अनुष्ठान

त्र नवरात्र में शुरू होने वाले सूर्योपासना के महापर्व चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान इस बार एक अप्रैल से शुरू हो रहा है. पहले दिन छठ करने वाले व्रती नहाय-खाय से अनुष्ठान का संकल्प लेंगे

भभुआ सदर. चैत्र नवरात्र में शुरू होने वाले सूर्योपासना के महापर्व चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान इस बार एक अप्रैल से शुरू हो रहा है. पहले दिन छठ करने वाले व्रती नहाय-खाय से अनुष्ठान का संकल्प लेंगे. दो अप्रैल को खरना होगा और तीन अप्रैल को भगवान भास्कर को सांध्यकालीन अर्घ और चार अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ के साथ चैती छठ महापर्व का अनुष्ठान संपन्न होगा. पंडित हरिशंकर तिवारी बताते हैं कि हिन्दू नववर्ष के पहले माह चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह महापर्व मनाया जाता है, इसमें भगवान भास्कर की उपासना से आरोग्यता, संतान प्राप्ति व मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. उन्होंने बताया कि छठ महापर्व मूल रूप से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है. वैदिक मान्यता है कि नहाय-खाय से सप्तमी के दिन पारण तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है, जो श्रद्धा पूर्वक व्रत करते है. पर्व में स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है. इधर, चैत्र नवरात्र में आनेवाले चैती छठ को लेकर शहर में तैयारी जोरों पर है. हालांकि, कार्तिक महीने में होनेवाली छठ पर्व की तरह चैती छठ में उत्साह नहीं रहता. लेकिन, मन्नत या फिर श्रद्धा भक्ति के लिए चैती छठ भी शहर सहित जिले में जोर शोर से मनायी जाती है. = मन्नत व बच्चों के लिए होता हैं छठ व्रत का अनुष्ठान पंडित हरिशंकर तिवारी के अनुसार छठ व्रत का अनुष्ठान बच्चों की रक्षा से जुड़ा है. जिस प्रकार से बच्चे के जन्म के बाद उसकी छठी मनायी जाती है. ठीक उसी प्रकार सूर्य की शक्ति के समक्ष बच्चों की रक्षा की जाती है. इस व्रत के वैज्ञानिक महत्व भी है. वर्ष में दो बार छठ व्रत मनाया जाता है. दोनों ही छठ का व्रत ऋतुओं के आगमन से जुड़ा है. कार्तिक मास में शरद ऋतु की शुरुआत होती है, तो चैत्र मास में वसंत ऋतु की. एक में ठंड की शुरुआत होती है, तो दूसरे में गर्मी की. बदलते मौसम में दोनों व्रत किया जाता है. इन दोनों ही ऋतुओं में रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है. इसे शांत करने के लिए सूर्य की आराधना की जाती है, जाे प्रकृति प्रदत पूजा है. पूजा में मौजूद सभी सामग्रियां प्रकृति से जुड़ी होती है. ताकि, रोगों से लड़ने की शक्ति मिल सके. = इन तिथियों को होगा चैती छठ का अनुष्ठान नहाय खाय-01 अप्रैल खरना- 02 अप्रैल सायंकालीन अर्घ- 03 अप्रैल प्रात:कालीन अर्घ- 04 अप्रैल

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By PRABHANJAY KUMAR

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