भभुआ. अनुमंडल क्षेत्र में भूमि विवादों के त्वरित और प्रभावी समाधान को लेकर गुरुवार को भभुआ एसडीएम अमित कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गयी. बैठक में भगवानपुर और चैनपुर के अंचलाधिकारी तथा थानाध्यक्ष शामिल नहीं हुए. इस पर एसडीएम ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है.
छह मामलों की हुई समीक्षा
गुरुवार को आयोजित बैठक में भूमि विवाद से जुड़े कुल छह मामले प्रस्तुत किये गये. दोनों पक्षों से मिली जानकारी और उपलब्ध तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद तीन मामलों का मौके पर ही सफलतापूर्वक निष्पादन कर दिया गया.
वहीं, शेष तीन मामलों में आवश्यक जांच और आगे की कार्रवाई करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया. एसडीएम ने मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर दिया.
भगवानपुर CO से मांगा जवाब
समीक्षा के दौरान भगवानपुर अंचलाधिकारी की ओर से भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में भ्रामक और अधूरी रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने की बात सामने आयी. इस पर एसडीएम ने नाराजगी जताते हुए अंचलाधिकारी से स्पष्टीकरण की मांग की.
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि भूमि विवाद जैसे मामलों में सही तथ्यों के आधार पर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करना जरूरी है, ताकि दोनों पक्षों की बात सुनकर उचित निर्णय लिया जा सके.
चैनपुर CO बैठक में नहीं पहुंचे
चैनपुर अंचलाधिकारी भी बिना किसी पूर्व सूचना के बैठक में उपस्थित नहीं हुए. इतना ही नहीं, उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि भी सुनवाई के लिए नहीं भेजा गया.
इस पर एसडीएम ने चैनपुर अंचलाधिकारी से भी स्पष्टीकरण मांगा है. अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर एसडीएम ने नाराजगी जतायी.
दोनों थानाध्यक्षों से भी जवाब तलब
बैठक में भगवानपुर और चैनपुर के थानाध्यक्ष भी उपस्थित नहीं हुए. दोनों थानाध्यक्षों ने अपनी जगह किसी प्रतिनिधि को भी बैठक में नहीं भेजा.
इसके कारण दोनों थानाध्यक्षों से भी स्पष्टीकरण की मांग की गयी है. भूमि विवाद के मामलों में पुलिस और अंचल प्रशासन की भूमिका अहम होने के कारण एसडीएम ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया.
लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
एसडीएम अमित कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. उन्होंने अधिकारियों को सही और पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के साथ निर्धारित समय सीमा में मामलों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि भ्रामक रिपोर्टिंग या समीक्षा बैठकों से बिना सूचना अनुपस्थित रहने को भी गंभीरता से लिया जायेगा. संबंधित सभी अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है.
