कैमूर के भभुआ सदर में पुलिस थानों और अन्य पुलिस संस्थानों में आग से बचाव की तैयारियों की जांच शुरू होते ही अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियां सामने आयी हैं. अग्निशमन विभाग की टीम ने गुरुवार को पहले दिन पुलिस लाइन स्थित मैगजीन हाउस, रक्षित कार्यालय, साइबर थाना, एसडीपीओ कार्यालय, पुलिस निरीक्षक कार्यालय और भभुआ सदर थाना समेत कई संस्थानों का निरीक्षण किया. जांच के दौरान इन स्थानों पर आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिलने की बात सामने आयी है.
पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के निर्देश पर यह जांच करायी जा रही है. एसपी की ओर से अग्निशमन विभाग के कमांडेंट को पत्र भेजे जाने के बाद विभाग की टीम जिले के अलग-अलग पुलिस संस्थानों का निरीक्षण कर रही है. टीम का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में पुलिस भवनों की तैयारी और उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है.
थानों और कार्यालयों में संसाधनों की हो रही जांच
अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी सुरेंद्र राम ने बताया कि अग्निशमन विभाग की टीम पुलिस थानों, कार्यालयों और अन्य संस्थानों में जाकर उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों की जांच कर रही है. इसमें मुख्य रूप से फायर एक्सटिंग्विशर समेत आग पर तत्काल काबू पाने के लिए जरूरी अन्य संसाधनों की उपलब्धता देखी जा रही है.
सिर्फ उपकरण मौजूद हैं या नहीं, इसकी जांच ही नहीं हो रही, बल्कि उनकी वैधता, रखरखाव और इस्तेमाल की स्थिति भी देखी जा रही है. टीम यह पता लगा रही है कि आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधन वास्तव में काम करने की स्थिति में हैं या नहीं.
पहले दिन रक्षित कार्यालय, मैगजीन हाउस, भभुआ सदर थाना, साइबर थाना, एसडीपीओ कार्यालय और पुलिस निरीक्षक कार्यालय समेत अन्य स्थानों का निरीक्षण किया गया. अग्निशमन विभाग के अधिकारी के अनुसार इन स्थानों पर आग से बचाव की कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली.
पुलिस रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सुरक्षा भी चुनौती
पुलिस थानों और कार्यालयों में बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड रखे जाते हैं. थानों में केस से संबंधित फाइलें, रजिस्टर, दस्तावेज और अन्य जरूरी सामान मौजूद रहता है. ऐसे में आग लगने की स्थिति में केवल भवन और सामान ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड के भी नुकसान का खतरा बना रहता है.
अग्निशमन विभाग की टीम इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रही है. अधिकारियों के अनुसार शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर जैसे उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी है.
आग लगने पर गंभीर हो सकती है स्थिति
थाना भवनों में पुलिसकर्मियों के अलावा फरियादी और अन्य लोग भी लगातार आते-जाते रहते हैं. ऐसे में यदि किसी भवन में अचानक आग लगती है और तत्काल उसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते हैं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है.
समय रहते आग पर काबू नहीं पाने पर जान-माल के नुकसान के साथ सरकारी भवन, दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए पुलिस संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना जरूरी माना जा रहा है.
जांच के बाद एसपी कार्यालय को भेजी जायेगी रिपोर्ट
अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी सुरेंद्र राम ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पुलिस संस्थानों की मापी समेत अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद संबंधित संस्थानों की स्थिति और सामने आयी कमियों से जुड़ी रिपोर्ट एसपी कार्यालय को भेजी जायेगी.
एसपी शिखर चौधरी के निर्देश पर शुरू हुई इस जांच में अग्निशमन विभाग की टीम कमियों को चिह्नित कर रही है. इसके बाद संबंधित पुलिस संस्थानों में जरूरी अग्निशमन संसाधनों की व्यवस्था कराने की दिशा में कार्रवाई की जा सकती है.
जिले के सभी पुलिस संस्थानों की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन-किन भवनों में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी कितनी कमियां हैं. फिलहाल पहले दिन की जांच में सामने आयी स्थिति पुलिस संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. इन कमियों को जल्द दूर कर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि किसी आपात स्थिति में आग को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके..
