मोहनिया में दम तोड़ रहा अब्दुल कलाम पुस्तकालय, लाखों की किताबें हो रहीं खराब

वर्षों से बंद पुस्तकालय बना खंडहर, प्रशासन व जनप्रतिनिधि बेखबर

वर्षों से बंद पुस्तकालय बना खंडहर, प्रशासन व जनप्रतिनिधि बेखबर पढ़ाई के संसाधनों की कमी के बीच शहर में नहीं बचा एक भी सक्रिय पुस्तकालय मोहनिया शहर. स्थानीय शहर के डाक बंगला परिसर में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर स्थापित पुस्तकालय आज बदहाली का शिकार हो चुका है. वर्षों से बंद पड़े इस पुस्तकालय में रखी लाखों रुपये की किताबें खराब हो रही हैं, जबकि भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. पढ़ाई के संसाधनों की कमी झेल रहे शहर में यह पुस्तकालय अब उपेक्षा व लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है. पुस्तकालय का भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है. छत से पानी टपक रहा है व चारों तरफ घास उग गयी है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है. सबसे अहम बात है कि कभी किताबों के शौक रखने वाले डॉ अब्दुल कलाम के नाम पर खुले इस पुस्तकालय से लोगों में खुशी थी, लेकिन पिछले कई वर्षों से पुस्तकालय वीरान पड़ा है. स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों की इस पर नजर नहीं है. मालूम हो कि मोहनिया शहर में कई शिक्षण संस्थान हैं, लेकिन बच्चों के पढ़ने के लिए एक भी सक्रिय पुस्तकालय नहीं है. काफी प्रयास के बाद जगजीवन मैदान परिसर में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर पुस्तकालय खोला गया था. कुछ दिनों तक इसका संचालन हुआ, लेकिन फिलहाल कई वर्षों से बंद पड़ा है. जहां अब ऑनलाइन संसाधनों के बढ़ने के कारण भी इस पर किसी की नजर नहीं है. पुस्तकालय में रखी लाखों रुपये की पुस्तकें खराब हो रही हैं. कभी गुलजार रहने वाला यह पुस्तकालय आज सन्नाटे में डूबा है, जहां कुर्सी व टेबल पूरी तरह से सड़ रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर खुला था पुस्तकालय पूर्व राष्ट्रपति व किताबों के शौकीन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर इस पुस्तकालय की स्थापना की गयी थी. मोहनिया के हेडमास्टर पद से सेवानिवृत्त हुए चंद्रजीत सिंह ने इसके संचालन में काफी रुचि दिखायी थी. लंबे समय तक यहां कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे व 26 जनवरी तथा 15 अगस्त को झंडोत्तोलन भी इनके द्वारा किया जाता था. लेकिन बढ़ती उम्र व घटती सक्रियता के कारण अब किसी बुद्धिजीवी द्वारा पहल नहीं की गयी, जिसके चलते पुस्तकालय कई वर्षों से बंद पड़ा है. यहां तक कि अब झंडोत्तोलन भी नहीं होता है. तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह द्वारा एक जुलाई 2001 को इस पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया था. उस समय यहां लोगों के बैठकर पढ़ने की समुचित व्यवस्था की गयी थी. तत्कालीन डीएम मिहिर कुमार के कार्यकाल में जब पुस्तकालय शुरू हुआ था, तब लोगों में काफी खुशी थी. कुछ समय तक संचालन भी हुआ, लेकिन ऑनलाइन दुनिया के बढ़ते प्रभाव व प्रशासनिक व सामाजिक शिथिलता के कारण यह बंद हो गया, जो अब तक चालू नहीं हो सका है. क्या कहते हैं शिक्षाविद –इस संबंध में शिक्षिका नीलम पांडेय ने बताया कि आजकल नये पुस्तकालय भी नहीं खुल रहे हैं, ऐसे में जो पहले से बना हुआ है उसे चालू कराने की जिम्मेदारी प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की है. इससे बच्चों व शिक्षा से जुड़े लोगों को काफी लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि पुस्तकालय को चालू कराने के लिए प्रयास करेंगी. — कृष्णा सेंट्रल स्कूल के निदेशक आलोक सिंह ने बताया कि बंद पड़े पुस्तकालय को चालू किया जाना चाहिए, ताकि आज के बच्चे पुस्तकालय की उपयोगिता को समझ सकें. आज के समय में बच्चे मोबाइल से ही जानकारी हासिल कर लेते हैं, लेकिन पुस्तकालय का अपना अलग महत्व है. प्रशासन को इस दिशा में पहल करनी चाहिए.

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Author: VIKASH KUMAR

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