आमांव के तालाब में कचरे का अंबार, छठव्रती परेशान

जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी ध्यान नहीं

जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी ध्यान नहीं रामपुर. प्रखंड क्षेत्र के आमांव, झाली भीतरी बांध सहित दर्जनों गांव के ग्रामीणों द्वारा घर के कचरे के साथ अन्य किसी समारोह में जमा कचरे को तालाब में ही फेंक दिया जाता है. वहीं, छठ महापर्व को लेकर इन तालाबों की साफ सफाई प्रशासनिक स्तर से भी नहीं करायी जा रही है. तालाब में जलकुंभी, कर्मी व अन्य घांस आदि उगने से ग्रामीण व छठ व्रती छठ पूजा के लिए घाट को ले काफी परेशान हैं कि इस बार छठ कैसे होगा. पोखरा व तालाब में इतनी गंदगी है कि छठ करने की बात तो दूर वहां कुछ देर ठहरना भी काफी मुश्किल है, जहां हर वक्त बदबू आती रहती है. अमांव गांव के अल्पसंख्यक टोला, महादलित बस्ती भीतरी बांध के ठीक पूर्व गांव में ही लगभग दो बीघा में पोखरा है, जो कभी गांव के मवेशियों के पानी पीने, नहाने धोने आदि के उपयोग आता था. लेकिन आज लोग उसी पोखरा से बीमारी व संक्रमण सहित अनेकों रोगों के शिकार हो रहे हैं. अमाव गांव के सोमारू राम, बीगन सिंह, सोना देवी, मनसा देवी सहित अन्य दर्जनों लोगो ने बताया लगभग सैकड़ों छठ व्रती यहां छठ व्रत करते थे, लेकिन इस बार काफी मुश्किल हो गया है. जब, सरकारी विभाग द्वारा तालाब, पोखर का सर्वे किया जा रहा था तो सरकारी कर्मियों ने बताया कि तालाब का सौदर्यीकरण कर इसे स्वच्छ किया जायेगा, लेकिन आज तक न कोई पदाधिकारी और न ही कोई कर्मी दोबारा आये. लोगों ने बताया गांव के सभी वर्ग के लोग अपने घरों का कचरा, किसी समारोह के पत्तल, ग्लास, दोना सहित बचा हुआ खाना, गोबर, राख आदि लाकर इसी पोखरा में फेंक देते है, मना करने पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं. महिलाओं ने बताया अभी कुछ राहत है, लेकिन गर्मी में हमलोग का यहां रहना भी मुश्किल हो जाता है. कचरे के सड़ने से हर वक्त अजीबोगरीब बदबू निकलती रहती है. हमलोग व हमारे बच्चों के पूरे शरीर व मूंह पर संक्रमण से रोग के लक्षण दिखने लगते है, जिसका हमलोग इलाज करा रहे हैं. डॉ ने बताया ये सब गंदगी की वजह से हो रही है, आप लोग गंदगी से बचें. इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधि मुखिया, वार्ड से लेकर पदाधिकारी तक गुहार लगायी गयी, लेकिन किसी ने अब तक नहीं सुनी है. गौरतलब है कि सरकार द्वारा जलछाजन, जल संरक्षण के लिए अनेकों योजनाएं चलायी जा रही है जो मनरेगा या अन्य विभाग के द्वारा तालाब ,पोखरा व कुआं की खुदाई करायी जा रही है, लेकिन पूर्व के तालाब, पोखर में कचरा फेंक कर भरा जा रहा है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. इसका जीता जागता उदाहरण अमांव, झाली, भीतरी बांध सहित प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों तालाब व पोखर का देखा जा रहा है. वहीं, आमांव गांव के बीच में दो बीघे का तालाब भी गंदगी भरा होने से लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है.

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Author: VIKASH KUMAR

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