मिट्टी के दीयों की बढ़ी पूछ

बदलाव. झालर व लरियों से दूर हो रहे लोग, कुम्हारों में खुशी मिट्टी के दीये व अन्य सामान की दुकान पर जमे लोग. पटाखों, लाइटों व मिठाइयों से सजा बाजार, आज जगमग हाेगी रात मोहनिया शहर : दीपों का पर्व दीपावली मनाने को लेकर अनुमंडल के विभिन्न हिस्सों में जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो गई […]

बदलाव. झालर व लरियों से दूर हो रहे लोग, कुम्हारों में खुशी

मिट्टी के दीये व अन्य सामान की दुकान पर जमे लोग.
पटाखों, लाइटों व मिठाइयों से सजा बाजार, आज जगमग हाेगी रात
मोहनिया शहर : दीपों का पर्व दीपावली मनाने को लेकर अनुमंडल के विभिन्न हिस्सों में जोर-शोर से तैयारियां शुरू हो गई हैं. रविवार को दीपावली है, इसलिए लोग अपने घरों की साफ-सफाई से लेकर रंग-रोगन कराने में जुट गये हैं. शहर से लेकर गांवों तक में रंग-बिरंगे झालरों की खरीदारी के साथ ही लोग घरों व प्रतिष्ठानों को सजा चुके हैं. अनुमंडल मुख्यालय मोहनिया कुदरा व पुसौली सहित अनुमंडल के अन्य प्रखंड सहित अन्य क्षेत्रों में विद्युत झालरों के साथ रंग-बिरंगी मिठाइयों से दुकानें सज गई हैं.
सजावट के सामान से बाजारों की रौनक बढ़ गयी है. इस पर्व में खरीदारों की भीड़ को देखते हुए जगह-जगह ठेले-खोमचे पर भी सामान सजे हैं. दीपावली के अवसर पर लाई-चिउरा का भी एक अलग महत्व है. अब यहां भी लोगों की आमद बढ़ी हुई है. इस पर्व को लेकर जहां लोगों के चेहरे पर खुशी की लहर है वहीं इसे यादगार बनाने के लिए मेहनतकश तैयारियों में जुटे हैं.
शहर व ग्रामीण इलाकों में सफाई की जा चुकी है.
दीयों में भी कलाकारी : इलेक्ट्राॅनिक क्रांति के दौर में बाजारों में भांति-भांति के विद्युत झालरों की भरमार हो गयी है. मिट्टी के दीये की हनक बरकरार है. प्रकाश पर्व दीपावली नजदीक आते ही रिहायशी इलाकों में मिट्टी के दीये बेचने के लिए नित्य कुम्हार आ रहे हैं. गांवों के साथ-साथ ऊर्जांचल की काॅलोनियों में भी दीये खरीदने में नागरिक व्यापक रुचि ले रहे हैं. इस वर्ष कुम्हारों द्वारा कई तरह की नक्काशी वाले दीये बनाये गये हैं. मिट्टी के दीयों की महत्ता के कारण ही प्रकाश पर्व को दीपावली कहा जाता है.
इलेक्ट्राॅनिक क्रांति के दौर में बाजारों में विभिन्न प्रकार के विद्युत झालरों की भरमार के कारण कई वर्षों से मिट्टी के दीये के प्रति लोगों का आकर्षण कम हो रहा था. इस वर्ष चीन निर्मित सामानों के बहिष्कार के प्रति व्यापक चेतना जागृत होने के कारण लोगों का रूझान फिर से दीये की तरफ बढ़ रहा है. रिहायशी इलाकों में इन दिनों दिनभर फेरी लगाकर दीये बेचने वालों की आवा जाही बनी हुई थी. लोगों के रूझान को देखते हुए कुम्हारों द्वारा भी तरह-तरह के नक्काशीदार दीये बनाये गये हैं. गांवों के साथ काॅलोनी परिसर में भी नागरिकों द्वारा जमकर दीये खरीदे जा रहे हैं.
क्या हैं धार्मिक मान्यताएं : मिट्टी के दीये का धार्मिक के साथ-साथ पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी काफी महत्व है. दीपावली .पर मां लक्ष्मी के पूजन में मिट्टी के दीये का ही प्रयोग किया जाता है. मान्यता है कि दीये में तेल के साथ बत्ती जलाने से तमाम हानिकारक कीट-पतंगे भी जलकर नष्ट हो जाते हैं.
सुरक्षा के नहीं हैं इंतजाम :
प्रकाश पर्व दीपावली के मौके पर पटाखा जलाने व जुआ खेलने का हर किसी का शौक होता है. बच्चों से युवक तक दीपावली की जगमगाहट के बीच पटाखे की आवाज सुनाना चाहते हैं. बेशक आप इस बार भी पटाखे छोड़िये लेकिन, जरा संभल कर. पटाखों के बाजार में भी जायें तो, आप खुद सावधान रहें ताकि,
कोई अनहोनी होने पर आप सुरक्षित वहां से निकल सकें. जी हां, अनुमंडल के मोहनिया कुदरा व पुसौली समेत अन्य शहरों में पटाखों की छोड़ी-बड़ी दुकानें सज गयी हैं. अफसोस है कि इन दुकानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. मोहनिया के स्टूवरगंज दुर्गा पड़ाव चांदनी चौक में पटाखे का बाजार सजाया गया है. एक तरफ पटाखे की दुकानें हैं तो, दूसरी तरफ लाई और चिउरा की. फायर ब्रिगेड की कोई गाड़ी नहीं नजर आयी.

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