रंगों की कीमत घटी, मजदूरी बढ़ी

दीपोत्सव के स्वागत में जुटे लोग, मजदूर मिलना हुआ मुश्किल भभुआ शहर : शहर में दीपावली को ले तैयारी जोरों पर है. लोग अपने घरों व दुकानों की साफ- सफाई में जुट गये हैं. दीपावली के दिन गृहस्वामी व व्यवसायी अपने- अपने घरों व प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा करेंगे. उस दिन […]

दीपोत्सव के स्वागत में जुटे लोग, मजदूर मिलना हुआ मुश्किल

भभुआ शहर : शहर में दीपावली को ले तैयारी जोरों पर है. लोग अपने घरों व दुकानों की साफ- सफाई में जुट गये हैं. दीपावली के दिन गृहस्वामी व व्यवसायी अपने- अपने घरों व प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा करेंगे. उस दिन व्यवसायी अपने पुराने हिसाब-किताब को पूरा करने की कोशिश करते हैं.
गौरतलब है कि दीपावली को ले पूरे शहर के लोग साफ- सफाई में जुट गये हैं. ऐसा मानना है कि दीपावली में साफ-सफाई करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है. नये व्यवसाय को लेकर भी लोग गंभीर हैं. दीपावली से ही ज्यादातर लोग नया व्यवसाय करते हैं.
समयाभाव बता कर काम नहीं कर रहे लोग
बाजार में मिलने वाले रंग-रोगन के सामान की कीमतों में गिरावट आयी है. समय की कमी व मजदूरों के नहीं मिलने से लोग अपने घरों में रंग- रोगन नहीं करा पा रहे हैं. गृहस्वामी मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि मजदूर समयाभाव बता कर सफाई करने से इनकार कर रहे हैं. गृहिणी माया देवी ने बताया कि मेरे घर के लोग बाहर रहते हैं. मै अपने घरों का रंग रोगन कराना चाहती हूं. मजदूर जल्दी काम करने के बजाय समय मांग रहे हैं. ऐसे में अपने घर की साफ- सफाई कर ही काम चला लूंगी. अजय कुमार चौबे बताते हैं कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल मजदूरी बढ़ी है. इस कारण से रंग रोगन नहीं कराया जा रहा है.
ट्रांसपोर्टिंग चार्ज घटने का मिला लाभ
पिछले साल की अपेक्षा इस साल रंग रोगन का सामान कुछ सस्ता हुआ है. शहर के आम हार्डवेयर के प्रोपराइटर विजय पाठक द्वारा बताया गया कि विगत डीजल व पेट्रोल की कीमतों में कमी आने से ट्रांसपोर्टिंग चार्ज कम हुआ है. जिस कारण से रंग- रोगन के सामान में कुछ कमी आयी है. बाजार में एशियन, नेरोलक, बर्गर, जॉनसन, डुप्लेक्स, कामधेनु व ब्रिटिश वेन ब्रांड के सामान बिक रहे हैं.
ट्रांसपोर्टिंग चार्ज घटने का मिला लाभ
पिछले साल की अपेक्षा इस साल रंग रोगन का सामान कुछ सस्ता हुआ है. शहर के आम हार्डवेयर के प्रोपराइटर विजय पाठक द्वारा बताया गया कि विगत डीजल व पेट्रोल की कीमतों में कमी आने से ट्रांसपोर्टिंग चार्ज कम हुआ है. जिस कारण से रंग- रोगन के सामान में कुछ कमी आयी है. बाजार में एशियन, नेरोलक, बर्गर, जॉनसन, डुप्लेक्स, कामधेनु व ब्रिटिश वेन ब्रांड के सामान बिक रहे हैं.
सामग्री 2016 की रेट प्रति लीटर2015 की रेट प्रति लीटर
एसी 165 175
एपेक्स 280 290
ट्रैक्टर एमलसन 150 160
रॉयल 300 310
ट्रैक्टर डिस्टेंपर 65 75
इकोलाइट पेंट 240 250
वाल प्राइमर 130 140
उड प्राइमर 180 190
मेटल प्राइमर 170 180
स्टोनर 500 510
ब्रश कीमत
4 इंच 100
3 इंच 60
2 इंच 20
1 इंच 10
क्या है रंग-रोगन कराने में मजदूरों की मजदूरी
2016 में मजदूरी2015 में मजदूरी
300 से 400 250 से 300
क्यों नहीं मिल रहे मजदूर
रंग- रोगन का काम कर रहे मजदूर उमेश प्रसाद, मल्लू गोस्वामी, पन्ने लाल, लटुरी कहार, दिनेश कुमार आदि का कहना है कि रंग- रोगन का पूरे साल छिटपुट चलता है. दीपावली के आने के बाद सभी लोग अपने घरों में रंग रोगन कराना चाहते है. पूरे साल इस काम के नहीं चलने से कारीगरों की संख्या कम होती है और कुछ कारीगर काम नहीं मिलने की वजह से बाहर चले जाते हैं. इस समय हमलोगों का काम इतना बढ़ जाता है कि हमलोग तीन शिफ्टों में काम करते हैं.
जो लोग जल्दी काम कराना चाहते हैं उनसे हमलोग उनके पूरे काम का ठेका ले लेते हैं. जब दिन का काम समाप्त हो जाता है तो शाम छह बजे से रात्रि नौ बजे तक चार- पांच मजदूरों की एक टीम बना कर काम करते हैं. काम बच जाता है तो, सुबह छह बजे 10 बजे तक करके पूरे दिन जिस व्यक्ति का काम लिये होते हैं उसके यहां जाकर काम करते हैं.
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