चमन लाल तालाब में कैसे होगा छठ

परेशानी. हर तरफ कचरे का ढेर व अितक्रमण सभी िकनारों पर कर लिया गया है अितक्रमण भभुआ शहर : शहर में बढ़ रहे अतिक्रमण का आलम यह है कि धार्मिक, सार्वजनिक स्थल, तालाब व पोखरा भी इससे वंचित नहीं हैं. शहर के बीच अवस्थित चमन लाल तालाब पर भी अतिक्रमण की साया है. इस तालाब […]

परेशानी. हर तरफ कचरे का ढेर व अितक्रमण
सभी िकनारों पर कर लिया गया है अितक्रमण
भभुआ शहर : शहर में बढ़ रहे अतिक्रमण का आलम यह है कि धार्मिक, सार्वजनिक स्थल, तालाब व पोखरा भी इससे वंचित नहीं हैं. शहर के बीच अवस्थित चमन लाल तालाब पर भी अतिक्रमण की साया है.
इस तालाब को लोग शहर की शोभा समझते हैं. आज यह तालाब इस दौर से गुजर रहा है कि जिसको जहां बन पड़ा तालाब का अतिक्रमण करने से नहीं चुकता. वर्तमान में तालाब का पूरा किनारा अतिक्रमण की चपेट में आ गया है. गौरतलब है कि शहर के बीच में अवस्थित चमन लाल तालाब एक समय इस शहर की पहचान थी. तालाब के किनारे शहर की आबादी थी व शहर के चारों तरफ रोड़ हुआ करता था. शहरवासी सुबह- शाम अपने काम से निवृत्त होने के बाद अपनी थकान मिटाने के लिये इस तालाब के किनारे मंदिरों और चबूतरों पर बैठते थे. तालाब के पानी का उपयोग आसपास के रहने वाले लोग पीने व भोजन बनाने में करते थे. आज इस तालाब की हालत ऐसी हो गयी है कि तालाब के पानी से बदबू आता है.
विकास पर खर्च हुए थे 50 लाख
चमन लाल तालाब को सुंदर बनाने के लिये नगर पर्षद द्वारा 50 लाख रुपये की लागत से घाट व कपड़े बदलने के रूम का निर्माण किया गया था. आज हर जगह अतिक्रमण कर लिया गया है.
इसकी चिंता न तो नगर पर्षद व न ही जिले के अधिकारियों को है. पूरे दिन घाटों के आसपास जुआरिओं का अड्डा रहता है. तालाब के किनारे मवेशियों को बांध दिया जाता है. इसके चलते सारी गंदगी तालाब में ही जाती है. तालाब का पानी दूषित हो गया है. लोग पानी से हाथ-मुंह घोने में भी परहेज करने लगे है. महिलाओं को कपड़ा बदलने के लिए बनाये गये रूम में मवेशियों का चारा रखा जाता है. तालाब के किनारे कचरे का अंबार है.

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