नवजात बच्चों की मां के लिए ठौर नहीं

सदर अस्पताल के एसएनसीयू में हर रोज भरती होते हैं कई बच्चे भभुआ (सदर) : अगर आप सदर अस्पताल में प्रवेश करेंगे तो आपको अस्पताल परिसर, बरामदे, चबूतरे और किसी विभाग के दरवाजे पर कुछ बैठी, कुछ लेटी , तो कुछ अन्य काम करतीं महिलाएं मिल जायेंगी. यह वे महिलाएं है, जिनके नवजात बच्चे किसी […]

सदर अस्पताल के एसएनसीयू में हर रोज भरती होते हैं कई बच्चे
भभुआ (सदर) : अगर आप सदर अस्पताल में प्रवेश करेंगे तो आपको अस्पताल परिसर, बरामदे, चबूतरे और किसी विभाग के दरवाजे पर कुछ बैठी, कुछ लेटी , तो कुछ अन्य काम करतीं महिलाएं मिल जायेंगी. यह वे महिलाएं है, जिनके नवजात बच्चे किसी न किसी परेशानी के चलते सदर अस्पताल के एसएनसीयू (गहन बाल रोग चिकित्सा इकाई) में भरती हैं. अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजात बच्चों के लिए लाखों रुपये खर्च कर इलाज की मुफ्त व्यवस्था तो कर दी गयी, लेकिन नवजात के परिजनों को यूं ही उनके अपने हालपर छोड़ दिया. इसके चलते एसएनसीयू में भरती नवजात बच्चों की माताएं अस्पताल परिसर, नर्सिंग स्कूल व ट्रेनिंग हॉस्टल के बरामदे और ड्रग वेयर हाउस सहित अधिकारियों के तंग नीयत से बनाये गये दस बाई दस के रोड पर दिन और रात गुजारने को मजबूर हैं. सदर अस्पताल का यही स्थान महिलाओं और उनके साथ आये परिजनों का आशियाना बनता है.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा एसएनसीयू की स्थापना के इस अक्तूबर में दो साल होने को हैं. लेकिन, जमीन उपलब्ध रहने के बावजूद गहन चिकित्सा इकाई में भरती नवजात के परिजनों के लिए एक निश्चित ठौर नहीं तलाशा जा सका. शहर के वार्ड संख्या सात के रविकांत राय का बच्चा एसएनसीयू में भरती है, लेकिन बाहर कोई व्यवस्था नहीं रहने के चलते घर से फोल्डिंग और चारपाई लाकर दिन बिताने को मजबूर हैं. रविकांत राय कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यवस्था तो काफी अच्छी की गयी है, लेकिन परिजनों के लिए भी व्यवस्था रहनी चाहिए. दिन तो जैसे-तैसे कट जाता है, रात को काफी परेशानी होती है. वहीं ड्रग वेयर हाउस को आशियाना बनाये सुनील कुमार ने बताया कि इस स्थान पर ही भोजन बनाया जाता है और यहीं पर अस्पताल से निकली गंदगी व कूड़े को फेंक दिया जाता है.
साउंड सिस्टम के साथ बनाया जायेगा वेटिंग हॉल
एसएनसीयू के बाहर नवजात के परिजनों की स्थिति पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ विवेक कुमार सिंह ने बताया कि बहुत जल्द ही एसएनसीयू के आस पास कमरा चिह्नित कर वेटिंग हॉल बनाया जायेगा. इसके अलावा साउंड सिस्टम भी लगाये जायेंगे, ताकि एसएनसीयू से एनाउंस कर नवाजातों की मां को जरूरत पड़ने पर बुलाया जा सके. एसएनसीयू के बाहर बने शेड में चबूतरा बनाने का निर्देश दिया गया है. वहां चेयर लगाया जायेगा.

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