कचहरी के बंद शौचालय में खुला होटल

अनदेखी : अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे वकील व मुवक्किल जिला व्यवहार न्यायालय, भभुआ को कई वर्ष होने के बावजूद आज भी यहां वकीलों व मुवक्किलों के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है. वकीलों के लिए जहां बैठने की व्यवस्था नहीं है, वहीं कोर्ट आनेवाले लोगों पेयजल व शौचालय की सही व्यवस्था नहीं होने […]

अनदेखी : अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे वकील व मुवक्किल
जिला व्यवहार न्यायालय, भभुआ को कई वर्ष होने के बावजूद आज भी यहां वकीलों व मुवक्किलों के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है. वकीलों के लिए जहां बैठने की व्यवस्था नहीं है, वहीं कोर्ट आनेवाले लोगों पेयजल व शौचालय की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण भारी परेशानियों का सामना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि बंद पड़े शौचालय में होटल तक खोल दिया गया है.
भभुआ (सदर) : गरमी का मौसम आते ही व्यवहार न्यायालय के वकीलों व केस के सिलसिले में आये लोगों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाती हैं. कचहरी परिसर में आम लोगों के लिए पेयजल व शौचालय की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं रहने के कारण अक्सर केस के सिलसिले में आनेवाले लोगों को खासकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जिला प्रशासन द्वारा आश्वासन दिये जाने के बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं कराने के चलते अधिवक्ता जैसे-तैसे खुद की व्यवस्था पर वकालत करने को मजबूर है.
मंगलवार को कचहरी परिसर में केस के सिलसिले में अपने वृद्ध पिता के साथ आयी भगवानपुर थाना क्षेत्र के नौगढ़ की मालती देवी ने बताया कि काफी देर से पानी के लिए भटक रही हूं. दुकानदार बिना कुछ खाने की वस्तु लिये पानी देने को तैयार नहीं हैं. न्यायालय परिसर में अक्सर पानी के लिए लोगों का भटकना आम बात है. क्योंकि, न्यायालय परिसर में फिलहाल दो ही चापाकल हैं.
वहीं, दो चापाकल लगाने के बाद से ही खराब पड़े हुए हैं. भीषण गरमी व धूप के चलते अक्सर लोगों को न्यायालय परिसर में भटकना पड़ता है. किसी ने चापाकल लगे स्थान की जानकारी दे दी तो ठीक, वरना होटल चलानेवालों द्वारा बिना कुछ खाने की वस्तु लिये पानी को हाथ भी नहीं लगाने देते हैं.
अपनी व्यवस्था पर वकालत करते हैं वकील
न्यायालय परिसर में एक जहां आम लोगों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो वकीलों को भी अपने बैठने की व्यवस्था खुद करनी पड़ती है. अधिवक्ताओं द्वारा झोंपड़ीनुमा या प्लास्टिक की ओट के नीचे बैठ कर काम किया जाता है. खास कर गरमी के दिनों में अधिवक्ताओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिलीप सिंह ने बताया कि जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन व जिला जज से गुहार लगायी गयी थी. मगर, अब तक जमीन उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. उन्होंने बताया कि अगर प्रशासन द्वारा शेड बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करा दी जाती है, तो अधिवक्ता संघ अपने खर्च पर शेड बनायेगा. इसके लिए अधिवक्ता संघ के पास फंड भी उपलब्ध है.

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