जाति, निवास, एलपीसी दाखिल-खारिज कराने के लिए पहुंच रहे ग्रामीण मायूस होकर लौट रहे
अधौरा : जिले के नक्सल प्रभावित व लाल गलियारे के नाम से जाना जानेवाला अधौरा प्रखंड में आज पांच दिनों से बिजली सेवा ठप रहने के कारण आरटीपीएस काउंटर बंद है. आरटीपीएस काउंटर बंद रहने से 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय अपने कार्यों को आनेवाले वनवासी बिजली उपेक्षा के कारण वापस उसी रास्ते घर लौट जाते हैं.
इस दौरान वनवासियों के चेहरे काम नहीं होने मायूस दिखे रहते हैं. खैर वनवासियों की परेशानी यही तक नहीं है. इन वनवासियों को सड़क से लेकर पानी, आवास सहित सरकार के अन्य योजना का भी लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है.
कई तरह की समस्याओं से जूझते हैं वनवासी : दरअसल, जिला मुख्यालय से 50 से 60 किलोमीटर की दूरी व कैमूर पहाड़ी की गोद में बसा अधौरा प्रखंड नक्सल प्रभावित व लाल गलियारे के नाम से भी जाना जाता है.
इस प्रखंड में वनवासी किसी तरह अपना सहित परिवार का भरण पोषण करते हैं. क्योंकि, प्राकृतिक ने इनको वह जगह दिया जहां खेती करना लोहे का चना चबाने के बराबर है. पहाड़ पर होने के कारण वहां पानी टिकाऊ नहीं होता है और खेतों की जमीन पथरीली होती है. इसके कारण खेती कर पाना यहां मुश्किल होता है.
वहीं सरकार की सेवाओं के बारे में देखे तो सात निश्चय के तहत नल जल, सड़क सहित आदि योजना का लाभ भी पूरी तरह से नहीं मिलता है. वहीं 2020 तक हर गांव बिजली दौड़ाने की दावा करनेवाली सरकार का यह दावा इस प्रखंड में नजर नहीं आ रहा है. क्योंकि, इसी बिजली के कारण पिछले पांच दिनों से अधौरा प्रखंड कार्यालय का आरटीपीएस काउंटर बंद है.
वृद्ध महिला व पुरुषों को हो रही ज्यादा परेशानी
इधर, आरटीपीएस काउंटर बिजली के कारण बंद होने से हर रोज 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय कर जाति, निवास, आय, दाखिल खारिज, एलपीसी सहित अन्य कार्य को लेकर आनेवाले वनवासी मायूस होकर वापस घर चले जाते हैं.
अधौरा प्रखंड के कर्मा की कलावती देवी, लखपतिया देवी, गड़के के फुलमतिया देवी, अधौरा दिव्यांग बालेश्वर यादव, जोरदाग के राजेश उरांव सहित दर्जन भर लोगों ने बताया कि प्रखंड सह अंचल का आरटीपीएस काउंटर पिछले पांच दिनों से लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है.
जबकि, क्षेत्र से जाति, आवासीय, वृद्धा, विधवा, कन्या विवाह सहित अन्य कार्य को ले लोग प्रखंड आते हैं. लेकिन, बिजली के नहीं रहने व काउंटर बंद रहने से आवेदन जमा नहीं होने के कारण वापस निराश होकर घर चले जाते हैं. खासकर वृद्ध महिला पुरुषों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.
