जागरूकता की कमी से जिले में टूट रहा परिवहन नियम
भभुआ सदर : अब इसे जागरूकता का अभाव कहें या नियमित जांच की कमी, वजह जो हो लेकिन यह 100 फीसदी सच है कि परिवहन नियमों को धता बताते हुए कैमूर में जान की कीमत पर लोग रफ्तार का शौक पाल रहे हैं. खास कर दोपहिया वाहन चालक तो इन नियमों को तोड़ने में सबसे आगे हैं. लेकिन, बाइक भले ही सरपट दौड़ाते हों.
लेकिन, ऐसे अधिकतर लोगों के पास इंश्योरेंस, ड्राइविंग लाइसेंस का अता-पता नहीं रहता है और न ही हेलमेट लगा कर चलना मुनासिब समझते हैं. और तो और कई बार बाइक चलाने की इनकी उम्र भी नहीं होती है और शायद ही इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस ही होता है. विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो सड़कों पर दौड़ रहे अधिकतर वाहनों के इंश्योरेंस फेल हैं. इसका खुलासा तब होता है, जब प्रशासन या परिवहन विभाग द्वारा वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है.
उस वक्त वैसी गाड़ियां ही अधिक पकड़ी जाती हैं और जिन पर फाइन किया जाता है कि उनके कागजात दुरुस्त नहीं होते. या यूं कहें कि जिनके पास न तो इंश्योरेंस रहता है और न ही ड्राइविंग लाइसेंस. खास बात तो यह है कि उनके पास हेलमेट भी नहीं रहते हैं. जबकि, इन परिस्थितियों में रफ्तार के शौकीनों को अपनी जान को भी दांव पर लगाना पड़ता है. कुछ सालों के प्रशासनिक आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं कि कैमूर जिले में सबसे ज्यादा मौत सड़क दुर्घटनाओं में ही होती है.
बीमा खर्च को बेकार समझते हैं लोग : गौरतलब है कि जिले में सड़कों पर सरपट गाड़ियां दौड़नेवाले वाहनों के मालिक अपने वाहनों पर बीमा रकम खर्च करना बेकार का मामला समझते हैं. शहर में परिवहन या पुलिस प्रशासन के ढीले ढाले रवैये और नियमित जांच न होने से भी लोगों की इस सोच का दायरा बढ़ता है. जबकि, देखा जाये तो बीमा केवल वाहनों के खोने या चोरी जाने के मुआवजे तक ही सीमित नहीं है. यह अपनी व दुर्घटनाओं में शिकार होने वाले औरों की सुरक्षा के लिए भी निहायत ही जरूरी है. बीमित वाहन से दुर्घटना के शिकार दूसरे व्यक्ति को भी थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मुआवजा मिलता है.
नियमित जांच अभियान चलाने की जरूरत
वाहन चलाते समय सिर में हेलमेट लगाना नितांत आवश्यक माना जाता है. दोपहिया वाहनों के दुर्घटना में अमूमन सिर में चोट लगने के कारण ही लोगों की मौत होती हैं. जबकि, हेलमेट पहने रहने से खुद के जीवन की भी बराबर सुरक्षा होती है. लेकिन, यहां लोगों के गले यह बात नहीं उतरती. संबंधित विभाग या प्रशासन सड़क सुरक्षा सप्ताह जैसे मौकों पर लोगों को यह बताने का प्रयास करते हैं. वाहन चेकिंग के दौरान जुर्माने भी भरते हैं. लेकिन, इन सब के बावजूद यहां लोगों ने हेलमेट पहनने की आदत अब तक नहीं डाली है. वैसे यह भी नियमित जांच न होने का ही नतीजा है. शहर के रहनेवाले आजाद सुलेमानी, शिवजी सिंह, मुन्ना प्रसाद का कहना था कि परिवहन या पुलिस के लोग अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद सड़क पर जांच करने निकलते हैं. लेकिन, कार्य में लापरवाही बरतने व कभी कभार चेकिंग करने से लोग मनमाने पर उतर आते हैं. अगर नियमित यह अभियान चलता रहे, तो लोग स्वयं ही वाहनों के कागजात सहित अन्य जरूरत के सामान साथ लेकर चलना उनकी भी मजबूरी बन जायेगी.
