मलेरिया किट से जांच पर केंद्र ने लगायी रोक

मोहनिया सदर : मलेरिया की जांच के लिए प्रयोग किये जानेवाले किटों से बीमारी की शुरुआती दौर में पुष्टि नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. धीरे-धीरे बुखार मरीज को अपनी गिरफ्त में इस कदर ले लेता है कि रोगी कमजोरी का शिकार होकर कई अन्य समस्याओं से भी घिर […]

मोहनिया सदर : मलेरिया की जांच के लिए प्रयोग किये जानेवाले किटों से बीमारी की शुरुआती दौर में पुष्टि नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. धीरे-धीरे बुखार मरीज को अपनी गिरफ्त में इस कदर ले लेता है कि रोगी कमजोरी का शिकार होकर कई अन्य समस्याओं से भी घिर जाता है. चिकित्सक को भी यह पता करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है कि आखिर मरीज को बुखार क्यों आ रहा है.

जांच के दौरान मलेरिया किट के अधिक प्रयोग किये जाने का सबसे बड़ा कारण पैथोलॉजिस्ट को परीक्षणों में आनेवाली कम लागत के साथ किट का आसानी से उपलब्ध होना है. पहले मलेरिया की जांच के लिए पैथोलॉजिस्ट द्वारा माइक्रोस्कोपिक जांच का प्रयोग मलेरिया के लिए किया जाता था. इसे अब भी सही माना जा रहा है. इस माइक्रोस्कोपिक जांच से मलेरिया के लक्षण शुरुआती दौर में ही सामने आ जाते थे. मरीजों की इसी परेशानी को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नयी दिल्ली ने 23 मार्च 2018 को आदेश संख्या 3152(अ) जारी कर मलेरिया कीट से जांच पर प्रतिबंध लगा दिया.

यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त की गयी विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर किया गया है. जांच के बाद विशेषज्ञ समिति ने केंद्र सरकार से

मलेरिया किट से…
सिफारिश की कि उक्त औषधि के बारे में यह पाया गया है कि उसका कोई चिकित्सकीय औचित्य नहीं है. विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने लोकहित को ध्यान में रखते हुए मलेरिया की जांच के लिए किट का प्रयोग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. केंद्र सरकार ने औषधीय और समाधान सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 26( क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मलेरिया किटों के निर्माण विक्रय व वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.
माइक्रोस्कोपिक जांच से शुरुआती दौर में हो जाता है मलेरिया का खुलासा
विशेषज्ञ समिति का मानना है कि माइक्रोस्कोपिक जांच पूरी तरह सही है, जिसमें जांच के दौरान शुरुआती दौर में ही मलेरिया का खुलासा हो जाता है. इससे चिकित्सक सही समय पर मलेरिया पीड़ित का इलाज करने में सफल होते हैं. लेकिन, जब से मलेरिया जांच के लिए किट का प्रयोग पैथोलॉजिस्ट द्वारा किया जाने लगा है. रोगी में मलेरिया के लक्षण शुरुआती दौर में सामने नहीं आ पा रहे हैं.
अब भी पैथोलॉजिस्ट कर रहे प्रयोग
मलेरिया किट से जांच पर रोक का सरकार का आदेश जारी होने के बाद भी जांच घरों में धड़ल्ले से मलेरिया किट का प्रयोग किया जा रहा है. बहुत से पैथोलॉजिस्ट को तक यह पता भी नहीं है की सरकार ने मलेरिया किट से जांच पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. वहीं, स्वास्थ्य विभाग भी सरकार के आदेश को लागू कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है, जिसका नतीजा यह है कि कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने, तो कुछ पैथोलॉजिस्ट जानकारी के अभाव में मलेरिया किट का प्रयोग कर रहे हैं.
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर परिवार कल्याण मंत्रालय ने लिया निर्णय
मलेरिया के किट से जांच में बीमारी की शुरुआती दौर की नहीं मिल पाती जानकारी

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