घोसी. परावन पंचायत अंतर्गत सोनवां गांव के वार्ड संख्या-3 में भूजल स्तर लगातार नीचे जाने से गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. वार्ड में लगे सभी सरकारी हथिया चापाकल पानी देना बंद कर चुके हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
रविदास टोला के 25 परिवार सबसे अधिक प्रभावित
पेयजल संकट का सबसे अधिक असर रविदास टोला के करीब 25 परिवारों पर पड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि टोले में सरकारी चापाकलों के खराब हो जाने से पानी का कोई स्थायी साधन नहीं बचा है. लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है.
समरसेबल के भरोसे ग्रामीणों की बुझ रही प्यास
फिलहाल गांव निवासी सुरेश दास के घर में लगे समरसेबल के माध्यम से कुछ लोगों को पानी मिल पा रहा है. हालांकि सीमित व्यवस्था होने के कारण सभी परिवारों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. ग्रामीणों ने बताया कि पानी के लिए सुबह और शाम सबसे अधिक परेशानी होती है.
नल-जल योजना की अनियमित आपूर्ति से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि नल-जल योजना का पानी भी निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता है. अनियमित जलापूर्ति के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई बार लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो बढ़ेगी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. गर्मी और गिरते भूजल स्तर के बीच लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है.
प्रशासन से नए बोरिंग और चापाकल की मांग
ग्रामीणों एवं परावन पंचायत के समाजसेवी कमलेश कुमार ने जिला प्रशासन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से समस्या के समाधान की मांग की है.
उन्होंने खराब पड़े चापाकलों की जांच कर मरम्मत कराने, नल-जल योजना का नियमित संचालन सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर नए बोरिंग या गहरे चापाकल की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि रविदास टोला सहित पूरे वार्ड के लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके.
