बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालय मल्हीपट्टी में आयोजित हुआ सखी वार्ता का हुआ आयोजन

अरवल जिले में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालय मल्हीपट्टी में सखी वार्ता का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में छात्राओं को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया, साथ ही बाल विवाह व बाल श्रम के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की गई.

Arwal News: अरवल जिले में जिला पदाधिकारी के निदेशानुसार चलाए जा रहे 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत शनिवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. महिला सशक्तिकरण कार्यालय एवं वन स्टॉप सेंटर, अरवल के संयुक्त तत्वावधान में प्राथमिक विद्यालय मल्हीपट्टी में सखी वार्ता कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें कक्षा 3 से 5 तक की छात्राओं को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया और सुरक्षित, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया.

गुड टच और बैड टच के प्रति छात्राओं को दी गई जानकारी

सखी वार्ता के दौरान वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक शिम्पू कुमारी, मनो-सामाजिक परामर्शी प्रिया कुमारी और जिला हब की वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ कविता सिंह ने बच्चियों के साथ सीधा संवाद किया. इस दौरान छात्राओं को गुड टच और बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा, यौन उत्पीड़न तथा अपने शरीर एवं व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति सजग रहने के बारे में बताया गया. बच्चियों से कहा गया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से छूने, डराने या धमकाने पर चुप न रहें, बल्कि तुरंत इसकी जानकारी अपने माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक अथवा किसी भी विश्वसनीय व्यक्ति को दें.

बाल विवाह और बाल श्रम के दुष्परिणामों पर चर्चा

कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया. छात्राओं को बताया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने से शिक्षा छूटती है और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं, कुपोषण तथा कम उम्र में गर्भधारण का जोखिम बढ़ता है. इसके अलावा बाल श्रम के नुकसान बताते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हर बच्चे को शिक्षा और स्वस्थ वातावरण में विकास का अधिकार है. बच्चियों को प्रेरित किया गया कि यदि आसपास बाल श्रम या बाल विवाह जैसी घटना दिखे तो इसकी सूचना जिम्मेदार पदाधिकारियों को जरूर दें.

संवादात्मक गतिविधियों से छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान

सखी वार्ता के दौरान संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चियों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान किया गया. उन्हें बताया गया कि शिक्षा और जागरूकता ही उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकती है. इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस)-सह-नोडल पदाधिकारी (महिला एवं बाल विकास निगम) माला कुमारी ने कहा कि सखी वार्ता का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बेटियां बिना किसी भय के आवाज उठाएं और अपने अधिकारों की रक्षा करें, यही जिला प्रशासन के इन निरंतर जागरूकता प्रयासों का मुख्य लक्ष्य है.

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By Nishikant kumr

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