Jehanabad News: जहानाबाद जिले में बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. किसान रोज सुबह आसमान की ओर टकटकी लगाए इस उम्मीद में देखते हैं कि शायद आज बारिश होगी, लेकिन उनकी उम्मीदें हर दिन टूट रही हैं. स्थिति यह है कि जिले में अब तक महज 11 प्रतिशत धान की रोपनी ही हो सकी है, जबकि 89 प्रतिशत रोपनी अभी बाकी है. इस वर्ष जिले में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
जुलाई माह में भी सामान्य से 65 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. यानी इस माह सामान्य वर्षा की तुलना में केवल 35 प्रतिशत ही बारिश हुई है. इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ रहा है. रोहिणी, मृगशिरा और आद्रा नक्षत्र बीत जाने के बाद भी मानसून की सक्रियता नहीं दिख रही है.
मोटर पंप के सहारे जिंदा रखनी पड़ रही फसल
जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र के दौरान धान के बिचड़े डाले थे, वे अब मोटर पंप के सहारे खेतों का पटवन कर फसल बचाने को मजबूर हैं. वहीं, जिन किसानों ने रोपनी कर ली है, उन्हें भी महंगे डीजल की मदद से मोटर पंप चलाकर पौधों को जीवित रखना पड़ रहा है.
धान के बीज बोने के लगभग 25 दिनों बाद मोरी तैयार हो जाती है और उसे खेतों में रोपने का समय आ जाता है. रोहिणी नक्षत्र के दौरान बोए गए अधिकांश बिचड़े अब पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनकी रोपनी नहीं हो पा रही है.
आसमान में नहीं दिख रहे बारिश के संकेत
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आसमान में दूर-दूर तक काले बादल नजर नहीं आ रहे हैं. इससे उन्हें निकट भविष्य में अच्छी बारिश की संभावना भी कम दिखाई दे रही है. सामान्य परिस्थितियों में आद्रा नक्षत्र के दौरान अच्छी बारिश होती है, जिससे धान की रोपनी का कार्य तेजी पकड़ता है, लेकिन इस बार स्थिति इसके विपरीत है.
खेतों में झुलस रही है धान की फसल और मोरी
बारिश के अभाव में खेतों में धान की फसल और मोरी झुलसने लगी है. किसान बृज किशोर सिंह बताते हैं कि उन्होंने रोहिणी नक्षत्र के अंतिम दिनों में बिचड़ा इस उम्मीद के साथ डाला था कि मानसून आने तक वह तैयार हो जाएगा और समय पर रोपनी कर ली जाएगी. लेकिन अब बारिश नहीं होने से उन्हें मोटर पंप के सहारे खेतों का पटवन करना पड़ रहा है.
उन्होंने बताया कि डीजल और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे खेती की लागत में भी भारी इजाफा हो रहा है.
तैयार मोरी में लग रहे हैं रोग
जिन किसानों की मोरी 38 दिनों से अधिक पुरानी हो चुकी है, उनमें रोग लगने की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं. कई किसानों की मोरी पीली पड़ रही है. पटवन और दवा के छिड़काव के बावजूद उनमें अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है.
कृषि जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो तैयार मोरी में गांठें पड़ने लगेंगी, जिसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा. वहीं, जिन किसानों ने अभी तक बिचड़े नहीं डाले हैं, वे भी खेती को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं. बारिश के इंतजार में जिले के किसान इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की कामना कर रहे हैं. यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो धान उत्पादन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है.
