Jehanabad News: (संजय अनुराग की रिपोर्ट) जिले में बार-बार बदल रहे मौसम की मार से लोग सीजनल बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. अभी हाल यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों में 65% से अधिक मरीज मौसमी सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित होकर आ रहे हैं. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर विपिन कुमार ने बताया कि इस मौसम में सबसे अधिक मरीज मौसमी और वायरल फीवर के ही इलाज करने के लिए आ रहे हैं इनमे वायरल और सीजनली फीवर के अलावा सर्दी खांसी के मरीज होते हैं. अन्य मरीजों की संख्या इसके मुकाबले कम होती है.
उन्होंने बताया कि इन दिनों कभी बारिश तो कभी गर्मी और फिर बारिश के बाद मौसम सुहाना होकर ठंडी हवाएं बहने लगती है. जिसके कारण लोग जल्दी बीमारी के चपेट में आ जाते हैं हालांकि यह सीजनली बुखार चार-पांच दिनों में ठीक हो जाता है. बार-बार मौसम बदलने का आलम यह है कि पिछले हफ्ते गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो रहा था. पिछले बुधवार को बारिश हो गई. बारिश के अगले ही दिन मौसम तपने लगा और फिर से गर्मी सताने लगी. इससे पहले रविवार को भी बारिश हुई थी लेकिन उसके अगले ही दिन फिर से मौसम तल्ख हो गया था. ऐसे में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आ जाती है. उसके बाद भीषण गर्मी झेल रहे लोगों को अचानक सुहावने मौसम से दो चार होना पड़ता है. बारिश के बाद अनुमान तापमान 30 से 35 डिग्री के आसपास रहता है. लेकिन उसके अगले ही दिन तापमान 40 डिग्री को छूने लगता है. बारिश के 2 दिन के बाद तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड से भी पार हो जाता है. दो दिन पहले हुई बारिश के बाद फिर से सूर्य की तीखी किरण लोगों को हलकान कर रही है.
अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेंटीग्रेड पर पहुंच गया है. जिसके कारण लोग उमस भरी गर्मी से परेशान है. इससे पहले भी बारिश और बदली से किसी दिन तापमान कम हो जाता है तो उसके अगले ही दिन सूर्य देव के प्रकोप से आसमान से तपिश भरी गर्मी कहर बरसने लगती है. बार-बार बदलते इस मौसम में लोग कभी गर्मी तो कभी ठंडी हवाओ की मार झेल रहे हैं. इस तरह बदलते मौसम की मार से लोग बीमार हो रहे हैं. बारिश होने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है वहीं वातावरण में नमी छाई रहती है इसके बाद सूर्य देव की तपिश बढ़ने से एक बार जहां तापमान बढ़ता है वहीं दूसरी ओर मौसम में उमस भरी गर्मी छा जाती है और नमी गायब हो जाती है. तापमान में इस प्रकार का परिवर्तन शरीर नहीं झेल पाता है और इससे शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. जिससे व्यक्ति बीमार हो जाता है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और बच्चे हो रहे हैं.
सभी अस्पतालों में बढ़ रहे हैं मरीज
बार बार बदलते मौसम के कारण बीमार होने वालों की संख्या बढ़ रही है. जिससे जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ विपिन कुमार बताते हैं कि इन दिनों मौसमी बीमारी से ग्रसित मरीजों के साथ-साथ अस्पताल में भीड़ भी बढ़ गई है. अस्पताल की में आने वाले मरीजों में 65 प्रतिशत से अधिक मरीज मौसमी बीमारियों के शिकार होते हैं. पहले जहां सदर अस्पताल की ओपीडी में 780 से भी कम मरीज इलाज कराने आ रहे थे. वही उनकी संख्या बढ़कर 750 से 800 हो गई है. इनमें ज्यादातर मरीज हेडेक बदन में दर्द, वायरल फीवर, गले में कंजेशन, सर्दी खांसी और जुकाम के मरीज शामिल हैं. वहीं कुछ मरीज टाइफाइड और डेंगू के भी आ रहे हैं. इधर इमरजेंसी में इन दिनों सर्दी खांसी बुखार के मरीजों के अलावा डायरिया वोमिटिंग और लूज मोशन के मरीज भी आ रहे हैं.
बार बार मौसम बदलने से इम्यूनिटी हो रही कमजोर
इन दिनों बार बार मौसम बदलने के कारण मानव शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. जिसके कारण वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर लोगों को बीमार बना देते हैं. जबकि कमजोर इम्यूनिटी के कारण उनका शरीर बैक्टीरिया और वायरस से नहीं लड़ पाता है. जिसके कारण कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग तुरंत बीमार पड़ जाते हैं. यही कारण है कि बदलते मौसम की मार सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ती है क्योंकि उनकी इम्युनिटी कमजोर होती है.
थोड़ी सी असावधानी से युवा भी आ जाते हैं इसकी चपेट में
जिले में इन दिनों लगातार बदल रहे मौसम के बीच असावधानी बरतने वाले युवा भी बीमारी की चपेट में आ जा रहे हैं. ऐसे में इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के साथ साथ युवाओं को भी सचेत रहने की जरूरत है. अपनी दिनचर्या में बदलाव लाकर और थोड़ी सी सावधानी बरतकर बदलते मौसम की मार से बचा जा सकता है. बाजार के चाट पकोड़े और जंक फूड खाकर युवा बीमार पड़ रहे हैं बाजार के इनफेक्टेड खाद्य सामग्रियों और दूषित पानी से लोगों को सर्दी खासी वायरल फीवर, टाइफाइड, डायरिया वोमिटिंग और लूज मोशन जैसे रोग हो रहे हैं.
इस मौसम में ऐसे बरतें सावधानी
बार-बार बदल रहे इस मौसम के बीच लोगों को बीमारी से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है. डॉ विपिन कुमार बताते हैं कि इस मौसम में घर का ताजा और सुपाच्य खाना खाएं, बाहर का जंक फूड और गरिष्ठ खाना ना खाएं। पानी भी घर का पीए. बाहर में आररो वॉटर का प्रयोग करें. बाहर के खान और पानी से परहेज करें. इससे हाइजीन मेंटेन होगा और दूषित खाने से बीमारी नहीं होगी. उन्होंने बताया कि कभी भी खाली पेट घर से नहीं निकलना चाहिए. हल्का भोजन करके और पानी पीकर बाहर निकले. बाहर से लौटने के बाद तुरंत पानी ना पिए और ना ही स्नान करें. नींबू पानी पिए मौसमी फलों का प्रयोग करें और किसी तरह की तबीयत में गड़बड़ी लगने पर तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें.
