जहानाबाद में सफाई कर्मियों की हड़ताल का आज तीसरा दिन, कूड़े और गंदगी से बेहाल हो रहे शहरवासी

शहर में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण तीसरे दिन भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हैं और नालियों की सफाई भी नहीं हो रही है. लोग गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं.

Jehanabas Nagar parishad strike: शहर में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण तीसरे दिन भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी. शनिवार से नगर परिषद की एजेंसी के सफाई कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण शहर में सफाई का काम ठप पड़ा है. तीन दिनों से न तो सड़कों पर झाड़ू लगी है और न ही कूड़े का उठाव हो पाया है. नालियों की सफाई भी नहीं हो रही है.

नगर परिषद की सफाई व्यवस्था मुख्य रूप से एजेंसी के जिम्मे है. एजेंसी में करीब 292 सफाई कर्मी कार्यरत हैं. इनके काम पर नहीं आने से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है. नगर परिषद के पास अपने 35 सफाई कर्मी थे, जिनमें अब मात्र 15 से 20 कर्मी ही बचे हैं. इनमें से ज्यादातर वीआईपी कार्यालय और आवासों की सफाई में लगे रहते हैं.

मुख्य सड़कों पर पसरी गंदगी

सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण शहर की मुख्य सड़कों और मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं. मुख्य शहर के मेन रोड, शिवाजी पथ, सब्जी मंडी, बड़ी मस्जिद रोड, अस्पताल रोड, थाना रोड और पुरानी अस्पताल रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर गंदगी पसरी हुई है.

सड़कों पर फैली गंदगी के कारण आम राहगीरों को परेशानी हो रही है. लोगों को कूड़े और गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों में नगर परिषद के प्रति नाराजगी है. लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर नगर परिषद की ओर से हर महीने एजेंसी को बड़ी राशि दी जाती है, इसके बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल है. नगर परिषद सफाई एजेंसी को शहर की सफाई के लिए प्रति माह 62 लाख रुपये प्रदान करती है.

वार्डों में भी सफाई व्यवस्था प्रभावित

शहर की मुख्य सड़कों का ही जब यह हाल है तो वार्डों और मोहल्लों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, नालियों की नियमित सफाई पहले भी नहीं होती थी. उनका कहना है कि कई जगहों पर 10-15 दिनों में नाली की सफाई होती है और उसमें भी केवल ऊपर का कचरा हटाया जाता है. सफाई कर्मियों की हड़ताल के बाद स्थिति और खराब हो गयी है. शहरवासियों को गंदगी और कूड़े के ढेर के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है.

सफाई एजेंसी के अधीन काम नहीं करना चाहते कर्मी

नगर परिषद की सफाई एजेंसी में काम करने वाले कर्मी एजेंसी के अधीन काम नहीं करना चाहते हैं. सफाई कर्मी कम वेतन मिलने का आरोप लगाते हुए वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. सफाई कर्मियों ने शनिवार से हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी. इसके बाद शहर के ठाकुरबाड़ी में पानी टंकी के समीप धरना-प्रदर्शन किया गया. कर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी और नगर परिषद को ज्ञापन भी दिया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

624 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग

सफाई कर्मी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनस्किल्ड वर्कर के बराबर 624 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि वर्तमान में सफाई एजेंसी की ओर से 424 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है.

कर्मियों का आरोप है कि वेतन से विभिन्न प्रकार की कटौती भी की जाती है, लेकिन कटौती का पूरा विवरण नहीं दिया जाता. उनके अनुसार, कटौती के बाद हाथ में आने वाला वेतन 400 रुपये से भी कम रह जाता है. सफाई कर्मियों ने पीएफ के नाम पर भी कटौती का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 1500 रुपये से अधिक की कटौती की जाती है, जबकि 500 रुपये कुछ जमा कराया जाता है. कर्मियों ने इस राशि पर ब्याज नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया है.

इसके अलावा सफाई कर्मियों ने सुपरवाइजर पर काम देने के एवज में पैसे मांगने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पैसे नहीं देने पर नया सफाई कर्मी रख लिया जाता है. नए कर्मी को रखने के लिए भी पैसे की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है.

प्रोटेक्शन किट नहीं मिलने का आरोप

एजेंसी के सफाई कर्मियों का कहना है कि सफाई के दौरान उन्हें सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं करायी जाती है. कर्मियों के अनुसार, उन्हें हेलमेट, दस्ताने, साबुन सहित अन्य प्रोटेक्शन सामग्री मिलनी चाहिए. सफाई कर्मियों ने एजेंसी के माध्यम से सफाई कार्य कराने के बजाय नगर परिषद में रहकर ही उनसे सफाई कार्य कराने की मांग की है.

क्या कहते हैं उपमुख्य पार्षद

नगर परिषद के उपमुख्य पार्षद पिंटू रजक ने बताया कि वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर एजेंसी के सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं. वे केंद्रीय अनस्किल कर्मियों के बराबर वेतन की मांग कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुसार अनस्किल कर्मियों के लिए 436 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन निर्धारित है. एजेंसी द्वारा कटौती के बाद 392 रुपये के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है.

उपमुख्य पार्षद ने कहा कि एजेंसी को मजदूरों के वेतन से की जाने वाली कटौती का पूरा विवरण देना चाहिए. राज्य सरकार की ओर से हर वर्ष दो बार अनस्किल लेबर के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जाती है, जिसका लाभ एजेंसी की ओर से नहीं दिया जाता है. इस सिलसिले में एजेंसी से बातचीत की जा रही है.

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By Sanjay Anurag

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