शहर के कई मकानों में बिना व्यावसायिक टैक्स के चल रहे हैं किराये पर भवन

शहर में प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में नये-नये भवन तैयार हो रहे हैं. ये मकान काजगी तौर पर आवासीय उद्देश्य के लिए बनाये गये पर इसका उपयोग व्यवसायिक तौर पर किया जा रहा है.

अरवल. शहर में प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में नये-नये भवन तैयार हो रहे हैं. ये मकान काजगी तौर पर आवासीय उद्देश्य के लिए बनाये गये पर इसका उपयोग व्यवसायिक तौर पर किया जा रहा है. शहर में हर साल सैकड़ों नये भवन बन रहे हैं, लेकिन कई ऐसे आवासीय भवन हैं जिनका इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है. यह शहर के विकास के लिए एक गंभीर समस्या है, क्योंकि इससे यातायात, प्रदूषण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है. इसमें दुकान से लेकर जांच घर, फैशन स्टोर, होटल आदि संचालित किये जा रहे हैं. इसके कारण नप को लाखों रुपये प्रतिवर्ष राजस्व की क्षति हो रही है. नगर परिषद के सभी 25 वार्डों में बने आवासीय मकानों का व्यवसायिक प्रयोग किया जा रहा है. अधिकतर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का भी टैक्स अवासिय भवन की दर से चुकाया जा रहा है. जबकि व्यवसायिक उपयोग में लाये जाने वाले मकानों का टैक्स अवासीय मकानों के टैक्स से कई गुणा अधिक होता है. नगर विकास एवं आवास विभाग का निर्देश है कि किसी भी आवासीय मकान के नाम पर बने भवन का व्यवसायिक हित में प्रयोग नहीं किया जा सकता है. यदि ऐसे मकानों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है तो उस मकान की तत्काल पहचान कर उस पर व्यवसायिक टैक्स वसूल किया जाय. शहरी क्षेत्र की सीमा के अंदर सैकड़ो ऐसे मकान हैं जिनके मकान मालिको ने यहां सरकारी नौकरी, व्यवसाय करने वाले बाहरी लोगों को अपना मकान किराए पर दे रखा है. इससे उन्हें प्रतिमाह किराए के रूप में हजारों रुपये का आय हो रहा है. लेकिन सरकारी रजिस्टर में मकान के अवासीय रूप में दर्ज होने के कारण सरकारी राजस्व का घाटा हो रहा है. नियमों का उल्लंघन : आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग नियमों का उल्लंघन है और यह शहर के विकास योजना के लिए एक बड़ी बाधा है. मालिकाना हक वाली किसी भी संपत्ति से मिली किराये की रकम पर ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के तहत टैक्स लगाया जाता है. यह सभी तरह की प्रॉपर्टीज पर लागू होता है, चाहे रिहायशी हो या कमर्शियल. कई मकानों में चल रहा सरकारी कार्यालय : अरवल शहर में कई निजी मकानों में सरकारी कार्यालय चल रहा है. जिसमें सहकारिता, गव्य विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, मत्स्य विभाग, पथ निर्माण, प्रखंड आइसीडीएस का कार्यालय निजी मकान में चल रहा है. क्या कहते हैं अधिकारी अभी गिनती नहीं की जा सकी है कि कितना व्यावसायिक मकान है और कितना आवासीय. जगन्नाथ यादव, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, अरवल

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Author: AMLESH PRASAD

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