सूखी नदी और ताल, लोग हैं बेहाल

जहानाबाद : शहर के मलहचक निवासी सुगना केवट, भोला केवट बताते हैं कि सिर्फ शहर में करीब 20 घर ऐसे हैं, जो दरधा नदी से मछलियां पकड़कर अपनी रोजी -रोटी कमाते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से नदी में पानी नहीं रहने के कारण अब उनके घर में दोनों टाइम चूल्हे जलने पर भी आफत […]

जहानाबाद : शहर के मलहचक निवासी सुगना केवट, भोला केवट बताते हैं कि सिर्फ शहर में करीब 20 घर ऐसे हैं, जो दरधा नदी से मछलियां पकड़कर अपनी रोजी -रोटी कमाते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से नदी में पानी नहीं रहने के कारण अब उनके घर में दोनों टाइम चूल्हे जलने पर भी आफत है. पेशेवर मछुआरे अपने परंपरागत काम को छोड़कर अब किसी तरह मजदूरी कर रहे है.

ये कहते हैं कि नदी में पानी जब होता था, तो सालों हमारा पूरा घर-परिवार सुखी रहता था. अब वो बात नहीं रही. पहले नदियों से काफी मात्रा में मछलियां निकलती थीं, जो बाजार पहुंचते-पहुंचते ऊंची दामों में बिक जाया करती थीं. अब वो दिन हवा हुए. घर की महिलाएं भी दूसरों के घरों में मजदूरी कर किसी तरह से घर संवार रही हैं.
बचपन से ही मछलियां पकड़ने का काम करने के कारण कोई दूसरा हुनर भी साथ नहीं है. पौ फटते ही ये मछली पकड़ने का जाल लेकर घर से निकल जाते थे. पहले नदी में जहां-तहां जमा पानी में रेहू, कतला, जासर जैसी मछलियां भी मिलती थीं. अब अपने बच्चों को इस पांरपरिक काम से हटाकर दूसरे काम में लगाना मजबूरी हो गयी है.
पशु-पक्षियों और मवेशियों की भी बढ़ी मुसीबत
गर्मी का मौसम अभी शुरू हुआ है, लेकिन जिले की नदियां अभी से ही सूख गयी हैं. अप्रैल-मई में नदियों के सूखने की वजह से इस साल जिले को पेयजल संकट का भी सामना करना पड़ सकता है.
शहर से होकर गुजरने वाली दरधा नदी समेत कई नदियों के सूखने से हैंडपंप भी जवाब देने लगा है. कुछेक एक जगहों पर कुएं का पानी पाताल के अंदर पहुंच गया है. बीते वर्ष माॅनसून के दौरान औसत से कम वर्षा रिकाॅर्ड की गयी थी.
इसकी वजह से भी तालाबों की हालत काफी खराब है. तापमान में निरंतर बढ़ोतरी होने से जल स्तर काफी घट रहा है. जिले भर के अधिकांश ताल-तलैये सूख गये हैं. जल स्तर में कमी और ताल-तलैये के सूखने से इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी और मवेशियों की भी मुसीबत बढ़ गयी है. दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी का संकट गहराने लगा है. गर्मी के कारण जल स्तर काफी नीचे चला गया है.
गंदे पानी में नहीं पैदा हो रहीं मछलियां
जानकार बताते हैं कि शहरी इलाके में दरधा नदी और जमुने नदी में दिख रहा पानी दरअसल शहर से निकलने वाली नालियों का गंदा पानी है, जिसमें गंदगी की अधिक मात्रा के कारण मछलियां नहीं पनप पातीं. गंदे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है. वहीं खतरनाक केमिकल के कारण मछलीपालन के लिए सही नहीं रहता.
शहर से बाहर नदी में बने गड्ढों में जो पानी रहता था उसमें मछलियां पनपती थीं लेकिन किसानों द्वारा सिंचाई के लिए मोटर चलाकर उस पानी को सींच लिया जा रहा है, जिससे मछुआरों के लिए अब कहीं कोई जगह नहीं बची.
जिले में काको में बड़ा पनिहास है, लेकिन सरकार ने उसको मछलीपालन के लिए निजी ठेकेदार को दे रखा है. वहीं जिले के अधिकांश ताल-तलैया सूख चुके हैं. ऐसे में मछुआरों के पास अपना पारंपरिक पेशा छोड़ने के अलावा कोई दूसरा उपाय भी नहीं है.
मछुआरों को नहीं मिल पा रहा योजना का लाभ
राज्य सरकार द्वारा मछुआरों के लिए योजनाएं चलायी जा रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ उत्तर बिहार के बाढ़ग्रस्त जिलों के मछुआरे ही उठा पा रहे हैं. जहानाबाद और अरवल में इस योजना का लाभ किसी मछुआरे को नहीं मिल पा रहा है. इसके पीछे मछुआरों में जानकारी का अभाव और विभाग द्वारा जिले में योजना के लिए राशि का आवंटन नहीं होना है. लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा.
शंभु कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जहानाबाद

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