लोकगायक जंग बहादुर सिंह को ‘सन ऑफ सिवान, प्राइड ऑफ बिहार’ सम्मान, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

Jang Bahadur Singh: देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर जीरादेई में आयोजित समारोह में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपम ने 105 वर्षीय लोकगायक और स्वतंत्रता सेनानी जंग बहादुर सिंह को ‘सन ऑफ सिवान, प्राइड ऑफ बिहार’ सम्मान दिया. वे मंच से उतरकर उन्हें सम्मानित करने पहुंचे.

Jang Bahadur Singh: देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर उनकी जन्मभूमि जीरादेई में बिहारी कनेक्ट ग्लोबल एवं बिहार फाउंडेशन लंदन चैप्टर की ओर से आयोजित गरिमामय समारोह में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपम ने 105 वर्षीय लोकगायक और स्वतंत्रता सेनानी जंग बहादुर सिंह को ‘सन ऑफ सिवान, प्राइड ऑफ बिहार’ सम्मान से अलंकृत किया. राष्ट्रपति का बड़प्पन और संस्कार यह है कि वयोवृद्ध गायक को सम्मानित करने के लिए वह स्वयम मंच के नीचे उतर आए. इस अवसर पर बिहारी कनेक्ट के अध्यक्ष डॉ. उदेश्वर सिंह ने कहा कि जंग बहादुर सिंह जैसी विभूति को सम्मानित करना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल एक कलाकार का अभिनंदन है, बल्कि भोजपुरी लोकधारा और स्वतंत्रता संग्राम की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान है.

10 दिसंबर 1920 को सिवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड स्थित कौसड़ गांव में जन्मे जंग बहादुर सिंह ने युवावस्था से ही देशभक्ति को अपने गायन का स्वर बनाया. 1942 से 1947 के स्वतंत्रता आंदोलन के उथल-पुथल भरे दौर में वे गांव-गांव घूमकर अपने देशभक्ति गीतों के जरिये आजादी का अलख जगाते रहे, जिसकी वजह से ब्रिटिश शासन की प्रताड़ना झेली, जेल भी गए, किंतु उनके स्वर का जोश कभी मद्धिम नहीं पड़ा.

पं. बंगाल के आसनसोल स्थित सेनरेले साइकिल कारखाने में कार्यरत रहते हुए उन्होंने भोजपुरी की व्यास शैली में गायन कर झरिया, धनबाद, दुर्गापुर, संबलपुर और रांची सहित देश के कई हिस्सों में अपनी अद्वितीय पहचान बनाई. कहा जाता है कि उनकी बुलंद आवाज बिना माइक्रोफोन के ही कोसों दूर तक गूंजती थी. रामायण, भैरवी और देशभक्ति गीतों के वे अप्रतिम साधक थे और वैसे ही उनके कद्रदान भी रहे. साठ के दशक में उनका नाम भोजपुरी जगत में शीर्ष पर रहा और लगभग दो दशकों तक उन्होंने बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में अपने गायन से बिहार का मान बढ़ाया. वे केवल गायक ही नहीं, कुश्ती के क्षेत्र में भी दक्ष पहलवान रहे. कोयलांचल की धरती पर उन्होंने अनेक दंगलों में विजय पताका लहराया.

प्रख्यात भोजपुरी गायक भरत शर्मा व्यास ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जंग बहादुर सिंह ने भोजपुरी को वह आधार दिया, जिससे उनका विकास संभव हुआ. वहीं 80 के दशक के लोकप्रिय गायक मुन्ना सिंह व्यास ने उनके लिए पद्मश्री सम्मान की मांग करते हुए कहा कि एक समय उनकी तूती बोलती थी और दूगोला प्रतियोगिताओं में वे अपराजेय थे. आज 105 वर्ष की आयु में यह महान लोकगायक गुमनामी में जीवन बिता रहे हैं, किंतु उनका योगदान भोजपुरी संस्कृति और स्वतंत्रता चेतना के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा.

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Published by: Pritish Sahay

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