न टंकी लगी, न घरों तक पहुंचा पानी, एक साल से पाइप और गड्ढों के सहारे जमुई के कई गांव

Jamui News : सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना से लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद थी. लेकिन जमुई के खैरा प्रखंड के दो गांवों में यह योजना खुद सवालों के घेरे में है. सड़क पर बिछी पाइपें, अधूरा निर्माण और एक साल से सूखी पड़ी उम्मीदें ग्रामीणों के गुस्से की वजह बन गई हैं.

जमुई से गुलशन कश्यप की रिपोर्ट

Jamui News : जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत गोपालपुर पंचायत के ढाब और कश्मीर गांव में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है. योजना शुरू हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक न तो पानी की टंकी लग सकी है और न ही किसी घर तक नियमित पेयजल पहुंच पाया है. ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है और सरकारी राशि के बंदरबांट के लिए काम कराया गया है.

पानी की आस में बीता एक साल, अब टूटने लगी उम्मीद

दोनों पहाड़ी गांवों में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गंभीर हो जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि यहां पानी के लिए पत्थरों का सीना चीरकर बोरिंग करनी पड़ती है. जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई चापाकल व बोरिंग जवाब दे चुके हैं. ऐसे में नल-जल योजना से लोगों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन एक साल बाद भी पानी नहीं मिलने से ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है.

टंकी का प्लेटफॉर्म बना, लेकिन टंकी आज तक नहीं लगी

कश्मीर गांव में योजना के तहत बोरिंग कराई गई और पानी की टंकी लगाने के लिए प्लेटफॉर्म भी बनाया गया. लेकिन आज तक उस पर टंकी नहीं लगाई गई. योजना स्थल पर पाइप खुले में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि धूप और मौसम की मार से पाइप की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, लेकिन विभाग और संवेदक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

सड़क के ऊपर दिख रही पाइप, नियमों की उड़ रही धज्जियां

ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय मानकों के अनुसार पाइप को जमीन में पर्याप्त गहराई तक दबाया जाना चाहिए. लेकिन गांव में कई जगह पाइप आधा फीट की गहराई पर ही डाल दी गई है, जबकि कुछ स्थानों पर तो पाइप सड़क के ऊपर ही बिछी हुई दिखाई देती है. लोगों का कहना है कि इस तरह का निर्माण भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकता है.

अधिकारियों ने लगाई फटकार, फिर भी नहीं सुधरा काम

ग्रामीणों की शिकायत पर विभागीय अधिकारियों ने पूर्व में स्थल निरीक्षण किया था. जांच के दौरान अनियमितताओं की पुष्टि होने पर कार्यपालक अभियंता ने संवेदक को गलत तरीके से बिछाई गई पाइप हटाकर नियमों के अनुरूप दोबारा काम करने का निर्देश दिया था. ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश का पालन करने के बजाय संवेदक ने कई महीनों तक काम ही बंद कर दिया.

खुले गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत, मवेशी तक हुए घायल

पाइप बिछाने के बाद कई जगह गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया था. इससे राहगीरों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा. ग्रामीण रामस्वरूप यादव ने बताया कि उनकी गाय खुले गड्ढे में गिर गई थी, जिससे उसका पैर फ्रैक्चर हो गया. बाद में ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर और श्रमदान कर गड्ढों को भरा.

सड़क निर्माण के बीच फिर बिछा दी गई पाइप

ग्रामीणों के अनुसार जब गांव में पक्की सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ, तब संवेदक ने जल्दबाजी में पुरानी पाइप निकालकर नई सड़क के बीच से पाइप डाल दी. इससे ग्रामीणों को आशंका है कि भविष्य में पानी का दबाव बढ़ने पर पाइप फट सकती है और सड़क क्षतिग्रस्त हो सकती है.

कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की उठी मांग

ग्रामीणों ने संवेदक और संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है. उनका कहना है कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं हुआ और गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल हैं. लोगों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण संवेदक मनमानी कर रहा है. ग्रामीणों ने मांग की है कि शेष कार्य किसी दूसरी एजेंसी से कराया जाए ताकि गांव को जल्द शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल सके.

क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीण जितेंद्र कुमार का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर सड़क के बीच में पाइप डाल दी गई है. मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.रामस्वरूप यादव ने बताया कि खुले गड्ढे में गिरने से उनकी गाय का पैर टूट गया और बाद में ग्रामीणों को खुद गड्ढा भरना पड़ा.ब्रह्मदेव मंडल का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों के निर्देशों का भी संवेदक पालन नहीं करता और मनमाने तरीके से काम किया जा रहा है.मिथलेश कुमार कहते हैं कि एक साल पहले लोगों को लगा था कि अब पानी की समस्या दूर होगी, लेकिन आज हालात पहले से भी ज्यादा निराशाजनक हैं.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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