खैरा: सिस्टम से निराश ग्रामीणों ने खुद उठाया कदम, चंदा जुटाकर नदी पर बनाने लगे 'चचरी पुल'

खैरा प्रखंड के जतहर गांव में वर्षों की सरकारी उपेक्षा के बाद, ग्रामीणों ने खुद ही नदी पर बांस-बल्लियों का 'चचरी पुल' बनाकर अपनी राह आसान कर ली है. चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान से निर्मित यह पुल बरसात के दिनों में उनकी जिंदगी को रुकने से बचाएगा. यह पुल एक अस्थायी समाधान है, स्थायी पुल की मांग जारी है.

खैरा प्रखंड अंतर्गत हरनी पंचायत के जतहर गांव में ग्रामीणों ने सरकारी उदासीनता और सिस्टम की अनदेखी का जवाब अपने स्तर पर दिया है. वर्षों से नदी पर पक्के पुल के निर्माण की मांग को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चौखट पर गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीणों ने अब खुद ही मोर्चा संभाल लिया है. कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता देख, ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और बांस-बल्लियों के सहारे नदी पर अस्थायी 'चचरी पुल' का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, ताकि बरसात के दिनों में उनकी जिंदगी पूरी तरह से ठहर न जाए.

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का नतीजा

जतहर गांव के ग्रामीणों का दर्द यह है कि नदी पर पुल नहीं होने के कारण उन्हें सालों से भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है. पुल निर्माण के लिए उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी मांग फाइलों और आश्वासनों में ही दबकर रह गई. किसी भी स्तर से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता देख, थक-हारकर ग्रामीणों ने खुद आगे आने का निर्णय लिया. ग्रामीणों ने स्वेच्छा से आपस में चंदा जुटाया और श्रमदान करते हुए बांस-बल्लियों की व्यवस्था कर इस चचरी पुल का निर्माण शुरू कराया.

जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं बच्चे

नदी पर पुल नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा गांव वालों को बरसात के दिनों में भुगतना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और तेज बहाव शुरू हो जाता है, जिससे गांव से बाहर निकलना नामुमकिन सा हो जाता है. इस विकट स्थिति में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें पढ़ाई के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करनी पड़ती है. इसके अलावा, गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने, किसानों को कृषि कार्य के लिए खाद-बीज और फसल लाने-ले जाने तथा दिहाड़ी मजदूरों को काम के लिए बाहर जाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

घंटों इंतजार के बाद अस्थायी समाधान, पक्के पुल की मांग

हालात इतने बुरे हो जाते हैं कि कई बार ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए पानी कम होने का घंटों तक इंतजार करना पड़ता है. इसी लगातार परेशानी से निजात पाने के लिए यह कदम उठाया गया है. हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि बांस-बल्ली का यह चचरी पुल केवल उनके द्वारा निकाला गया एक फौरी और अस्थायी समाधान है, जो भारी बारिश या तेज बहाव में कभी भी बह सकता है. इस बड़ी समस्या का स्थायी समाधान केवल प्रशासन ही कर सकता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि उनकी परेशानी को गंभीरता से लेते हुए अविलंब नदी पर पक्का पुल निर्माण कराया जाए.


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लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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