परंपरागत हथियार से लैस आदिवासियों ने की जमकर नारेबाजी
पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी को दिया ज्ञापन
चकाई. प्रखंड के विभिन्न आदिवासी कल्याण छात्रावास का नाम बदलने से आक्रोशित आदिवासियों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को प्रखंड मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही. आदिवासी छात्र युवा मंच के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व जिला पार्षद राम लखन मुर्मू ने किया, जबकि शामिल बास्के ने कार्यक्रम का संचालन किया. इसका शुभारंभ आदिवासी कल्याण छात्रावास से किया गया. इसके बाद परंपरागत हथियार, तीर धनुष, वरचा, भाला,लाठी, ढोल नगाड़ा के साथ बड़ी संख्या में आदिवासी बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए पूरे चकाई बाजार का भ्रमण करते हुए प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया.
आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित कर बंधुवा मजदूरी की ओर धकेलना की मंशा का आरोप
आदिवासी नेता राम लखन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदाय आज भी आर्थिक रूप से वंचित है और जंगलों पर निर्भर होकर गुजर बसर करने को मजबूर है. आदिवासी छात्रों को मुफ्त रहने और पढ़ने की सुविधा देकर शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की गयी, लेकिन सरकार को क्या जल्दबाजी थी कि अचानक आदिवासी छात्रावास का नाम बदलकर आदिवासी छात्रों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश रची जा रही है. साथ ही सरकार आदिवासी दलित को आपस में लडाना चाहती और फूट डालो राज करो की नीति अपना कर आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित कर कारखाना फैक्ट्री में बंधुवा मजदूरी की ओर धकेलना चाहती है. उन्होंने कहा कि जब तक पूर्व की भांति आदिवासी छात्रावास का नाम नहीं रखा जाएगा तब तक हम लोग व्यापक जन आंदोलन चलाएंगे. प्रदर्शन के बाद पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन बीडीओ मनीष आनंद को सौपा गया जिसमें छात्रावास के नामकरण में अविलंब सुधार करने, 15 साल से बंद पड़े माडा योजना को चालू करने, स्कूल कालेज, ट्यूशन, कोचिंग सेंटर में शिक्षा के नाम पर मनमाना पैसा वसूली बंद करने, छात्रावास में बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने, आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर हो रही लूट बंद करने की मांग शामिल है. प्रदर्शन को किशोर मुर्मू,अनिल मुर्मू सहित बड़ी संख्या में आदिवासियों ने संबोधित किया.
