बरहट : सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के बीच बरहट प्रखंड के पाड़ों पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहिरा पाड़ो की स्थिति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. विद्यालय का मूल भवन जर्जर होने के बाद बच्चों को उत्क्रमित मध्य विद्यालय भदबरिया में शिफ्ट किया गया. वहां पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर अब सामुदायिक भवन के छोटे कमरे और बरामदे में कक्षाएं चल रही हैं.
विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक 375 बच्चे नामांकित हैं. मौजूदा व्यवस्था में कक्षा एक, दो और तीन के बच्चों को एक ही छोटे कमरे में बैठाकर पढ़ाया जाता है, जबकि जगह के अभाव में कक्षा चार के बच्चों की पढ़ाई सामुदायिक भवन के बरामदे में होती है.
एक कमरे में तीन कक्षाएं, बच्चों का ध्यान बंट रहा
एक ही कमरे में तीन कक्षाएं संचालित होने से बच्चों के साथ शिक्षकों को भी परेशानी हो रही है. एक शिक्षक एक कक्षा को पढ़ाते हैं, तो उसी कमरे में दूसरी कक्षाओं के बच्चे भी पढ़ते रहते हैं. अलग-अलग कक्षाओं की आवाजें एक-दूसरे में घुलने से बच्चों का ध्यान भटकता है और उन्हें पाठ समझने में परेशानी होती है.
स्कूल पहुंचने में तय करना पड़ता है दो किमी का रास्ता
बच्चों की परेशानी सिर्फ कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं है. मूल विद्यालय से सामुदायिक भवन तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. बारिश के दिनों में खेतों और कच्चे रास्तों से होकर बच्चों को स्कूल पहुंचना पड़ता है. छात्रों के अनुसार रास्ते में कई बार वे फिसलकर गिर भी चुके हैं.
छात्र बोले- बैठने की जगह ही नहीं, पढ़ाई कैसे समझें?
कक्षा चार की छात्रा दिव्यांशी कुमारी ने बताया कि पहले स्कूल पाड़ों में चलता था. यहां आने के बाद काफी परेशानी हो रही है. छोटे कमरे में सभी बच्चों के बैठने की जगह नहीं रहती. एक साथ कई कक्षाएं चलने के कारण शिक्षक क्या पढ़ा रहे हैं, यह ठीक से समझ में नहीं आता.
कक्षा तीन के छात्र रिशु कुमार ने बताया कि स्कूल आने के लिए करीब दो किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है. बरसात में खेतों से होकर आना पड़ता है और रास्ते में कई बच्चे गिर चुके हैं.
कक्षा दो के छात्र शिवम कुमार ने कहा कि तीन कक्षाएं एक साथ चलने से पढ़ाई समझने में परेशानी होती है. बच्चों ने पुराने विद्यालय भवन की मरम्मत कराकर वहीं से पढ़ाई शुरू कराने की मांग की.
प्रधानाध्यापक ने भी मानी समस्या
प्रधानाध्यापक मो. मनोवर हसन ने बताया कि मूल विद्यालय भवन से शिफ्ट किये जाने के बाद सामुदायिक भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. पर्याप्त कमरों के अभाव में बच्चों को पढ़ाई में परेशानी हो रही है. इसकी जानकारी विभाग को दी गयी है.
निरीक्षण के बाद कार्रवाई का आश्वासन
प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा कि प्रधानाध्यापक से पूरे मामले में बातचीत की जाएगी. विद्यालय का निरीक्षण करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल 375 बच्चों की पढ़ाई सीमित जगह और असुविधाजनक माहौल में चल रही है. ऐसे में सवाल यही है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल कब मिलेगा?
