अलीगंज. रमजान के पवित्र माह की शुरुआत रविवार से हो गयी है. मुस्लिम समाज के लोगों ने रमजान का पहला रोजा रख कर संध्या मे इफ्तार किया. मस्जिद के इमाम मो मोबिन, मो ऐनुल हक़ कहते हैं कि रमजान में रोजा रख कर रात-दिन इबादत करने से बहुत सबाब मिलता है. इस इबादत से अल्लाह खुश होता है. माह-ए-रमजान के पहले दिन से ही पहला अशरा शुरू हो जायेगा. हाफ़िज़ मोबिन बताते हैं कि इस्लाम के मुताबिक पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है. एक से दस रमजान पहला अशरा होता है, जिसे रहमत का अशरा कहते हैं. दूसरा अशरा ग्यारह से बीस रमजान मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा इक्कीस से तीस रमजान जहन्नम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है. रमजान के शुरुआती 10 दिनों में रोजा-नमाज करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है.
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