जमुई: 19 दिनों में 19 रुपये महंगी हुई चीनी, फीकी पड़ी चाय की चुस्की और मिठाइयों का स्वाद

जमुई में चीनी की कीमतों में 19 दिनों में 19 रुपये प्रति किलो की भारी वृद्धि हुई है. इस महंगाई की मार अब आम आदमी की चाय की चुस्की और त्योहारों की मिठाइयों के स्वाद पर भी पड़ने लगी है. चाय दुकानदारों और मिठाई विक्रेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ गई है और मुनाफा घट रहा है.

जमुई जिले में लगातार बढ़ रही महंगाई की मार अब आम आदमी की चाय की चुस्की और त्योहारों की मिठाइयों के स्वाद पर भी पड़ने लगी है. पिछले 19 दिनों के भीतर चीनी की कीमतों में लगभग 19 रुपये प्रति किलो की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चीनी के दाम 65 से 66 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाने से चाय दुकानदारों से लेकर मिठाई विक्रेताओं तक की परेशानी काफी बढ़ गई है. अचानक बढ़ी इस कीमत ने कारोबारियों की उत्पादन लागत तो बढ़ा दी है, लेकिन वे बिक्री प्रभावित होने के डर से ग्राहकों पर तत्काल अतिरिक्त बोझ डालने से बच रहे हैं, जिससे उनका मुनाफा सीधे तौर पर घट रहा है.

चाय दुकानदारों का बिगड़ा बजट, कीमत बढ़ाना मुश्किल

चाय की दुकानों पर रोजाना बड़ी मात्रा में चीनी की खपत होती है. दुकानदारों के अनुसार, चीनी के दाम बढ़ने से उनका रोजाना का खर्च काफी बढ़ गया है. दूध, चायपत्ती, कमर्शियल गैस और अन्य सामग्री की कीमतों में पहले से हुई बढ़ोतरी ने उनकी परेशानी को और गहरा कर दिया है. स्थानीय चाय कारोबारी गुल्लू कुमार, सुजीत कुमार और धर्मेंद्र तांती ने बताया कि मौजूदा स्थिति में एक कप चाय की कीमत बढ़ाना आसान नहीं है. उन्हें डर है कि यदि वे चाय की कीमत बढ़ाते हैं, तो नियमित ग्राहक कम हो जाएंगे, जिसका सीधा और नकारात्मक असर उनके रोजगार पर पड़ेगा.

त्योहारी सीजन में आम लोगों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

आने वाले दिनों में रक्षाबंधन और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहारों को लेकर बाजार में मिठाइयों की मांग में भारी तेजी आएगी. ऐसे समय में चीनी की कीमत में यह उछाल मिठाई कारोबारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. मिठाइयां तैयार करने में चीनी के साथ-साथ दूध, खोवा, घी, मैदा और ड्राई फ्रूट्स जैसी महंगी सामग्रियों का इस्तेमाल होता है. इन सभी सामग्रियों के साथ अब चीनी की लागत बढ़ने के कारण आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा.

दुकानदारों के मुनाफे में आई कमी, सरकार से नियंत्रण की मांग

लागत और बिक्री मूल्य के बीच सामंजस्य बिठाना अब छोटे कारोबारियों के लिए बड़ा संघर्ष बन गया है. स्थानीय दुकानदार बादल सिंह, सुनील कुमार और पवन कुमार ने बताया कि कारोबार में खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसका पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना उनके लिए व्यावहारिक नहीं है. कीमत बढ़ाने पर बिक्री प्रभावित होने का डर हमेशा बना रहता है. वहीं, पुरानी कीमत पर ही चाय और मिठाइयां बेचने की मजबूरी से उनका मुनाफा लगातार सिमटता जा रहा है. इस विकट स्थिति से जूझ रहे छोटे कारोबारियों ने सरकार और प्रशासन से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग की है, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके.


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By Rahul Kumar Singh

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