एक साल से स्कूल के गेट पर सड़ा पानी, संक्रमण के साये में बच्चे : मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, फिर भी नहीं निकला हल

बरहट के नूमर पंचायत में सरकारी दावों की पोल खुल रही है, जहां एक प्राथमिक विद्यालय के पास सालभर से सड़ा हुआ पानी जमा है. इस जलजमाव से बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई हो रही है और संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता चिंताजनक है.

जमुई : सरकार गांवों में बेहतर सड़क, स्वच्छता और बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल की बात करती है, लेकिन बरहट प्रखंड के नूमर पंचायत के वार्ड नंबर-2 स्थित प्राथमिक विद्यालय केवाल के पास की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है. स्कूल के मुख्य द्वार और गांव में प्रवेश करने वाली सड़क पर करीब एक साल से सड़ा हुआ पानी जमा है. पानी में काई, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप है. इसी गंदे पानी से होकर बच्चे स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं और ग्रामीण अपने घरों तक जाते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार आवेदन दिया गया और अधिकारियों से गुहार लगायी गयी. शिकायत मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ.

स्कूल जाने का रास्ता बना गंदे पानी का रास्ता

जलजमाव के कारण प्राथमिक विद्यालय के मुख्य द्वार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. छोटे बच्चों को पानी पार कर स्कूल जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार कई घरों के आसपास भी पानी जमा है.

स्थानीय ग्रामीण टुनटुन दास, भोला दास, रामचंद्र रविदास, कमलेश कुमार, मनीष भारती और रणधीर यादव ने बताया कि लंबे समय से जमा पानी के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. शाम होते ही आसपास सड़ांध और दुर्गंध फैलने लगती है.

ग्रामीणों का दावा है कि जलजमाव के कारण कुछ लोग बीमार भी पड़े हैं. उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है.

जलजमाव की समस्या के मुख्य बिंदु

  • स्कूल के मुख्य द्वार और सड़क पर करीब एक साल से पानी जमा.
  • पानी में काई, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप.
  • बच्चों को गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचने की मजबूरी.
  • कई घरों के आसपास भी जलजमाव.
  • ग्रामीणों के अनुसार कई बार अधिकारियों को दिया गया आवेदन.
  • मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत पहुंचने का ग्रामीणों का दावा.
  • अधूरी नाली के कारण जलनिकासी बाधित होने की बात सामने आयी.

नाली निर्माण शुरू हुआ, विरोध के बाद रुक गया

ग्रामीणों के अनुसार बरसात से पहले सरकारी जमीन पर नाली निर्माण का काम शुरू कराया गया था. लेकिन स्थानीय मांझी समुदाय के कुछ लोगों के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया. इसके बाद नाली अधूरी रह गयी और पानी की निकासी का रास्ता नहीं बन सका.

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी कई बार मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका.

आवेदन देते रहे ग्रामीण, पानी नहीं निकला

ग्रामीणों का कहना है कि जलजमाव खत्म कराने के लिए लगातार आवेदन दिये गये. हर बार उम्मीद थी कि नाली का निर्माण पूरा होगा और पानी की निकासी की व्यवस्था होगी. लेकिन करीब एक साल बाद भी स्थिति जस की तस है.

ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए प्रशासन को और कितने आवेदन चाहिए. उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो संक्रमण और बीमारी का खतरा और बढ़ सकता है.

ग्रामीणों ने मांगा स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों ने तत्काल जलनिकासी कराने, अधूरी नाली का निर्माण पूरा करने और भविष्य में जलजमाव की समस्या दोबारा नहीं हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस संबंध में नवपदस्थापित उप विकास आयुक्त शिप्रा विजय कुमार चौधरी ने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि जलजमाव की समस्या वास्तव में बनी हुई है, तो संबंधित प्रखंड पदाधिकारी से समन्वय कर जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएंगे.

फिलहाल सवाल यही है कि स्कूल के गेट तक पहुंचा यह जलजमाव कब खत्म होगा और बच्चों को गंदे पानी से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से कब राहत मिलेगी.

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By Prabhat khabar news desk

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