जमुई. चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होगा और इस दिन से नौ दिनों तक माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जायेगी. आचार्य पंडित शत्रुघ्न झा ने बताया कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा गुरुवार को पड़ रही है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस कारण वर्ष के राजा का पद गुरु को और मंत्री का पद भूमि को प्राप्त हुआ है. यह वर्ष रौद्र नामक संवत्सर के रूप में जाना जायेगा. उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का आरंभ किया था. नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री का आह्वान और पूजन किया जायेगा. इस दिन कलश स्थापना सुबह 6:56 बजे के बाद किसी भी शुभ मुहूर्त में की जा सकती है. आचार्य झा ने बताया कि चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है. इस अवसर पर सनातन धर्म के अनुयायी अपने घरों में मंगल ध्वज, तोरण और अन्य शुभ सजावट कर पूजा-अर्चना करते हैं. नवरात्र के नौ दिनों तक माता गौरी के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व माना जाता है और भक्त श्रद्धा के साथ व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं.
19 मार्च से वासंतिक नवरात्र शुरू, सुबह 6:56 बजे बाद कलश स्थापना
चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होगा और इस दिन से नौ दिनों तक माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जायेगी.
