श्रावणी मेले से पहले सोनो में NH 333 बदहाल: बटिया घाटी से सोनो चौक तक सड़कों पर उभरे जानलेवा गड्ढे, हादसों की आशंका

NH 333 Potholes: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत में अब महज 15 दिन शेष हैं, लेकिन जमुई के सोनो क्षेत्र में NH 333 की जर्जर स्थिति कांवरिया वाहनों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. बारिश के पानी से भरे गड्ढे कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं.

NH 333 Potholes: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत में अब महज एक पखवाड़े (15 दिन) का समय शेष रह गया है, लेकिन जमुई जिले के सोनो क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 333 (NH 333) की जर्जर स्थिति कांवरिया वाहनों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है. देवघर से पूजा कर चकाई-सोनो के रास्ते लौटने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए पानी से भरे ये गड्ढे कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं.

बारिश के पानी से लबालब गड्ढे बढ़ा रहे हैं खतरा

सोनो क्षेत्र से गुजरने वाले इस मुख्य मार्ग पर आम दिनों में वाहनों की रफ्तार काफी तेज होती है. शुष्क मौसम में तो स्थानीय चालक गड्ढों को देखकर अपनी गति नियंत्रित कर लेते हैं, लेकिन मानसून (बरसात) के इस मौसम में स्थिति बेहद भयावह हो जाती है. लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क के ये बड़े-बड़े गड्ढे पानी से लबालब भर जाते हैं. ऐसे में बाहरी राज्यों या अन्य क्षेत्रों से आने वाले कांवरिया वाहनों के चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के पलटने या अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना प्रबल हो जाती है.

सोनो चौक के पास आधा किलोमीटर सड़क पूरी तरह ध्वस्त

स्थानीय स्थिति का जायजा लेने पर पता चलता है कि एनएच 333 पर बटिया घाटी से लेकर सोनो चौक तक सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है. सोनो चौक के समीप तो लगभग आधा किलोमीटर का मुख्य हिस्सा पूरी तरह टूट चुका है. खासकर जुगड़ी मोड़ से लेकर झाझा रोड तक का खंड न केवल जर्जर हो चुका है, बल्कि यहाँ जानलेवा गड्ढे उभर आए हैं. सोनो चौक पर स्थित 'वी बाजार' के समीप और झाझा रोड में 'सोनो इमरजेंसी अस्पताल' के पास बने गड्ढों के कारण अब तक आधे दर्जन से अधिक छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं. यह मार्ग वर्तमान में ई-रिक्शा, ऑटो और मोटरसाइकिल चालकों के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है.

बटिया घाटी के खतरनाक मोड़ों पर जलजमाव

बटिया घाटी के तीखे मोड की स्थिति

सोनो क्षेत्र में प्रवेश करते ही बटिया घाटी के दूसरे घुमावदार मोड़ (ब्लाइंड टर्न) पर भी गहरे गड्ढे बन गए हैं. इस पहाड़ी मोड़ का ढलान पहाड़ की तरफ होने के कारण बारिश के पानी की निकासी का कोई मुकम्मल जरिया नहीं है. इसके चलते थोड़ी सी भी बारिश होते ही पूरा मोड़ तालाब में तब्दील हो जाता है. पानी के भीतर छिपे इन गड्ढों के कारण मोड़ काटते समय भारी और हल्के वाहनों का संतुलन अचानक बिगड़ जाता है.

श्रावण मास में सैकड़ों वाहनों का रहता है दबाव

उल्लेखनीय है कि एनएच 333 बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यस्ततम लाइफलाइन मार्ग है. सामान्य दिनों में भी यहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों मालवाहक और यात्री वाहन गुजरते हैं. श्रावण मास शुरू होते ही इस मार्ग पर कांवरिया वाहनों, बसों और तख्तपोश गाड़ियों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि हो जाती है. बाहरी क्षेत्रों के चालक इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति और इन छिपे हुए गड्ढों से पूरी तरह अनभिज्ञ होते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल है.

NH 333 Potholes: स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई से त्वरित मरम्मत की मांग

इस गंभीर और संवेदनशील परिस्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि श्रावणी मेला शुरू होने से पहले स्थानीय अनुमंडल प्रशासन को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित निर्माण विभाग से समन्वय स्थापित करना चाहिए. मेले के औपचारिक शुभारंभ से पहले युद्धस्तर पर इन गड्ढों में बोल्डर-डस्ट फिलिंग करवाकर और टूटी सड़कों की रोलिंग-मरम्मत करवाकर इस सफर को श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए.

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लेखक के बारे में

By Pankaj kumar singh

पंकज कुमार सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के जमुई कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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