मृतका की पहचान जमुई के कैराकादो गांव निवासी गणेश मांझी की 16 वर्षीय पुत्री गुड़िया कुमारी के रूप में हुई है. शुक्रवार की देर रात सोते समय सांप के काटने के बाद ओझा-गुणी के चक्कर में युवती का शरीर जहर से पूरी तरह नीला पड़ चुका था. शनिवार की सुबह जब उसे सदर अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका. इस दुखद घटना के बाद सदर अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया.
आधी रात को बिस्तर पर काटा, सुबह तक चलता रहा तांत्रिक अनुष्ठान
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की देर रात करीब डेढ़ बजे गुड़िया अपने घर में सो रही थी. इसी दौरान एक अत्यधिक विषैले सांप ने उसे डस लिया. दर्द से चिल्लाने पर जगे परिजनों ने सूझबूझ दिखाने के बजाय गांव में ही झाड़-फूंक करने वाले तांत्रिक (ओझा) को बुला लिया. शनिवार की भोर तक कई घंटों तक तंत्र-मंत्र का खेल चलता रहा और सांप का जहर धीरे-धीरे किशोरी के पूरे शरीर में फैल गया.
अस्पताल पहुंचने के चंद घंटों में ही तोड़ा दम
जब किशोरी की हालत बेहद नाजुक हो गई और वह अचेत (बेहोश) होने लगी, तब परिजनों की आंखें खुलीं. आनन-फानन में शनिवार सुबह करीब छह बजे उसे इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया. सदर अस्पताल के ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने एंटी-वेनम (Anti-Venom) की डोज देकर उसे बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. जहर ने अंदरूनी अंगों को पूरी तरह प्रभावित कर दिया था, जिसके कारण उपचार के दौरान ही गुड़िया ने दम तोड़ दिया.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की दो टूक: झाड़-फूंक नहीं, 'एंटी-वेनम' ही है एकमात्र इलाज
इस दुखद घटना पर सदर अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है. चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, भारत में पाए जाने वाले जहरीले सांपों (जैसे कोबरा या करैत) के काटने पर शरीर में न्यूरोटॉक्सिन या हीमोटॉक्सिन जहर फैलता है, जिसका मुकाबला केवल और केवल अस्पताल में मिलने वाले एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन से ही किया जा सकता है. ओझा या घरेलू नुस्खों के पास जहर काटने की कोई दवा नहीं होती.
सर्पदंश होने पर क्या करें और क्या न करें (विभागीय एडवाइजरी):
- तुरंत अस्पताल भागें: सांप काटने के बाद बिना एक सेकंड गंवाए मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाएं, जहां एंटी-वेनम मुफ्त और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है.
- अंधविश्वास से बचें: झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी, या ओझा-गुणी के चक्कर में पड़कर मरीज का 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती कीमती समय) बर्बाद न करें.
- मरीज को शांत रखें: घबराहट के कारण दिल की धड़कन तेज होती है, जिससे जहर शरीर में तेजी से फैलता है. इसलिए मरीज को सांत्वना दें और शांत लेटाकर रखें. उसे खुद पैदल न चलने दें.
- चीरा या कट न लगाएं: घाव वाले स्थान पर ब्लेड से चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने या बिना डॉक्टरी सलाह के कोई कसकर पट्टी (टूर्निकेट) बांधने की कोशिश न करें, इससे गैंग्रीन या संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
फिलहाल, पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और अस्पताल प्रबंधन कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है. इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिक्षा और अंधविश्वास के खिलाफ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत को रेखांकित किया है.
