जमुई. रविवार को पितृ विसर्जन के साथ पितृ पक्ष का समापन हो जायेगा और सोमवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो जायेगा. इस बार चतुर्थी तिथि दो दिन होने से नवरात्रि कुल 10 दिनों की होगी. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा ने बताया कि नवरात्रि का लंबा होना शुभ फलदायी माना जाता है. इन दिनों में भक्त मां दुर्गा के उग्र और सौम्य दोनों रूपों की उपासना करेंगे. गौरतलब है कि नवरात्रि को लेकर जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक जोर-शोर से पूजा की तैयारियां चल रही हैं. पंडित झा ने कहा कि कलश स्थापना का मुख्य काल सूर्योदय से चार घंटे तक का समय है. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त भी सर्वसिद्धिदायक होता है. उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के लिए पहला मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 04:35 बजे से सुबह 05:22 बजे तक है, जबकि अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 06:09 बजे से सुबह 07:40 बजे तक है. उन्होंने बताया कि इस दौरान कन्या लग्न भी रहेगा, जो काफी शुभ माना जाता है. दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक है. वहीं तीसरा मुहूर्त अभिजीत काल का है, जो दिन में 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा. उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर को रात 01:23 बजे से प्रारंभ होकर 23 सितंबर को रात 02:55 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर नवरात्रि का पहला दिन 22 सितंबर को होगा. इस दिन शुक्ल योग प्रातः से शाम 07:59 बजे तक रहेगा. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 11:24 बजे तक और उसके बाद हस्त नक्षत्र प्रभावी रहेगा. उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के दिन प्रातः संध्या मुहूर्त सुबह 04:58 बजे से सुबह 06:09 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:15 बजे से दोपहर बाद 03:03 बजे तक रहेगा.
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