Sakhi Varta Jamui: जमुई. अनजान लिंक पर एक क्लिक, किसी से ओटीपी साझा करना या सोशल मीडिया पर निजी जानकारी देना कभी-कभी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है. वहीं कम उम्र में होने वाली शादी बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर भी असर डाल सकती है. इन मुद्दों को लेकर जमुई के खैरा प्रखंड स्थित प्लस टू राघो सिंह स्मारक उच्च विद्यालय, बड़ाबांध में शनिवार को बालिकाओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया.
महिला एवं बाल विकास निगम के अंतर्गत डिस्ट्रिक्ट हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन जमुई की ओर से आयोजित सखी वार्ता कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सशक्तीकरण, महिला अधिकार, लैंगिक समानता, बाल विवाह, बाल सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के बारे में जानकारी दी गयी. कार्यक्रम में बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें शिक्षा, कौशल और वित्तीय समझ के जरिये आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया.
सरकारी योजनाओं की जानकारी, ताकि बालिकाओं तक पहुंचे लाभ
कार्यक्रम में अधिकारियों ने छात्राओं को मिशन शक्ति के तहत संचालित संबल और सामर्थ्य योजनाओं की जानकारी दी. इसके साथ वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत, शक्ति सदन, सखी निवास और पालना गृह जैसी सेवाओं के बारे में बताया गया.
बालिकाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना समेत शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सशक्तीकरण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गयी.
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी होना उनके लाभ तक पहुंचने की पहली सीढ़ी है. छात्राओं को योजनाओं के बारे में जानकारी हासिल करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग या सहायता केंद्र से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया.
शिक्षा और कौशल से आत्मनिर्भर बनने का संदेश
सखी वार्ता के दौरान छात्राओं को केवल अधिकार और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी ही नहीं दी गयी, बल्कि भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के रास्तों पर भी चर्चा की गयी.
उन्हें शिक्षा जारी रखने, कौशल विकास सीखने, स्वरोजगार के अवसर तलाशने और वित्तीय साक्षरता विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया. अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय समझ बालिकाओं और महिलाओं को अपने आर्थिक फैसले खुद लेने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
ऑनलाइन लेन-देन में छोटी गलती पड़ सकती है भारी
कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को लेकर भी छात्राओं को व्यवहारिक जानकारी दी गयी. सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, बचत और ऑनलाइन लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया.
छात्राओं को सलाह दी गयी कि सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचें और किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें. ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक खाते से संबंधित जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की हिदायत दी गयी.
साइबर ठगी होने की स्थिति में देर करने के बजाय तत्काल शिकायत करने को कहा गया. डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा की समझ बच्चों और युवाओं के लिए भी जरूरी हो गयी है. ऐसे में स्कूल स्तर पर इस तरह की जागरूकता छात्राओं को ऑनलाइन जोखिम पहचानने में मदद कर सकती है.
बाल विवाह से शिक्षा और भविष्य पर पड़ता है असर
कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी विस्तार से चर्चा की गयी. छात्राओं को बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी देते हुए कम उम्र में शादी के सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभावों के बारे में बताया गया.
अधिकारियों ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए बाल विवाह को रोकना जरूरी है. छात्राओं को किसी भी बाल विवाह की स्थिति में संबंधित अधिकारियों या हेल्पलाइन से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया.
बाल शोषण की स्थिति में तुरंत लें सहायता
सखी वार्ता में पॉक्सो अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी गयी. छात्राओं को बताया गया कि किसी भी तरह के बाल शोषण या लैंगिक अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय तत्काल सहायता लेनी चाहिए.
कार्यक्रम में महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन सेवा 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी दी गयी. छात्राओं से कहा गया कि हिंसा, उत्पीड़न, बाल विवाह या साइबर अपराध जैसी किसी भी स्थिति में संबंधित हेल्पलाइन से मदद ली जा सकती है.
Sakhi Varta Jamui: जागरूकता से मजबूत होगी बालिकाओं की सुरक्षा
कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक मुकेश कुमार, जेंडर स्पेशलिस्ट कुमार गौरव, वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ विकास कुमार और एमटीएस रवि कुमार मौजूद रहे.
सखी वार्ता जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बालिकाओं को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों, सुरक्षा और उपलब्ध सरकारी सहायता तंत्र के प्रति जागरूक बनाना है. स्कूल स्तर पर मिली यह जानकारी छात्राओं को अपने साथ-साथ परिवार और आसपास की अन्य बालिकाओं को भी जागरूक करने में मदद कर सकती है.
बाल विवाह रोकने, साइबर अपराध से बचने और जरूरत के समय सही सहायता तक पहुंचने के लिए जागरूकता के साथ-साथ परिवार, स्कूल और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता से बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण और अपने भविष्य को लेकर बेहतर निर्णय लेने की जानकारी मिल सकती है.
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