जमुई : सदर अस्पताल में इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के बीच अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. नियमानुसार अज्ञात शव की पहचान के लिए उसे 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए, लेकिन सदर अस्पताल में इसके लिए पर्याप्त और उपयोगी व्यवस्था नहीं है. विडंबना यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब छह माह पहले अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने के लिए दो कंटेनर उपलब्ध कराये गये थे, लेकिन अब तक उनका उपयोग शुरू नहीं हो सका है. दोनों कंटेनर सदर अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष के समीप स्थित ट्राइज रूम में पड़े हैं और धूल फांक रहे हैं.
अज्ञात शव के साथ पहुंचे चौकीदार हुए परेशान
ताजा मामला मंगलवार देर रात चकाई प्रखंड के चिलखारी गांव के समीप सामने आया, जहां अज्ञात वाहन की टक्कर से एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गयी. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया. पोस्टमार्टम के बाद शव को 72 घंटे तक सुरक्षित रखने की जरूरत थी. लेकिन अस्पताल में समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शव के साथ पहुंचे चौकीदार परेशान नजर आये.
पहले पोस्टमार्टम हाउस में रखे जाते थे शव
पोस्टमार्टम कर्मियों के अनुसार, पहले अज्ञात शवों को त्रिपुरारी सिंह नदी घाट स्थित पोस्टमार्टम हाउस में पहचान के लिए रखा जाता था. कुछ दिन पहले वहां एक अज्ञात शव सड़ी-गली अवस्था में मिलने के बाद सिविल सर्जन ने पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने पर रोक लगा दी. इसके बाद अज्ञात शवों को संबंधित थाना परिसर में पहचान के लिए रखने की बात सामने आयी. हालांकि, थाना परिसर में शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं, यह भी सवाल बना हुआ है.
सड़ चुके शव के मामले के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
बताया जाता है कि कुछ दिन पूर्व त्रिपुरारी सिंह नदी घाट स्थित पोस्टमार्टम हाउस में एक अज्ञात शव सड़ी-गली अवस्था में मिला था. अज्ञात शव की पहचान के लिए उसे पोस्टमार्टम के बाद वहां रखा गया था. निर्धारित 72 घंटे की अवधि बीतने के बाद भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नहीं होने के कारण शव पूरी तरह सड़-गल गया था. मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे.
72 घंटे तक पहचान का किया जाता है प्रयास
नियमानुसार अज्ञात शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसकी पहचान के लिए निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखा जाता है. इस दौरान पुलिस फोटो और अन्य विवरण के माध्यम से आसपास के थाना क्षेत्रों में सूचना देकर परिजनों की तलाश करती है. 72 घंटे तक पहचान नहीं होने पर नियमानुसार स्थानीय थाना पुलिस की मदद से शव का अंतिम संस्कार कराया जाता है.
ऐसे में सदर अस्पताल में शव संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पुलिसकर्मियों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है. सवाल यह है कि जब शव को सुरक्षित रखने की सुविधा ही उपलब्ध नहीं होगी, तो निर्धारित अवधि तक पहचान की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी.
छह माह से कंटेनर, फिर भी सुविधा शुरू नहीं
अस्पताल परिसर में दो कंटेनर करीब छह माह से पड़े हैं. यदि इन्हें शव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराया गया है तो आवश्यक तकनीकी और विद्युत व्यवस्था कर इन्हें जल्द चालू किया जाना चाहिए. कंटेनरों के उपयोग में नहीं आने से सरकारी संसाधन भी बेकार पड़ा है और जरूरत के समय पुलिसकर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
कहते हैं अस्पताल प्रबंधक
अस्पताल प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण कंटेनर नहीं लगाया जा सका है. इसकी जानकारी वरीय पदाधिकारियों को दी गयी है. जल्द ही शव रखने वाले कंटेनर को पोस्टमार्टम हाउस में लगाकर सुविधा शुरू कर दी जायेगी.
