झाझा. प्रखंड के रजला औरैया गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले कई दशकों से बंद पड़ा है. कभी ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाला यह केंद्र अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. भवन जर्जर, दीवारें टूटी हुई और परिसर गंदगी व घास-फूस से भरा पड़ा है. यही नहीं, यह जगह अब आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है. स्वास्थ्य केंद्र के जीर्णोद्धार व पुनः चालू करने की मांग को लेकर शनिवार को ग्रामीणों ने अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने डीएम, सीएस, स्वास्थ्य विभाग सचिव और बिहार सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जल्द कार्रवाई की मांग की. अभाविप नेता कार्तिक कुसुम और राजेश यदुवंशी ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र बंद रहने से ग्रामीणों को मामूली बीमारी या आपात स्थिति में भी छह किलोमीटर दूर झाझा जाना पड़ता है. इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान पर भी खतरा मंडराता रहता है. प्रदर्शनकारियों ने इसे ग्रामीणों के स्वास्थ्य-अधिकार का हनन बताते हुए कहा कि सरकार को शीघ्र कदम उठाना चाहिए, अन्यथा आंदोलन तेज किया जायेगा. प्रदर्शन में छोटू पांडेय, श्याम कुमार, प्रेम कुमार, रंजन विश्वकर्मा, संतोष कुमार, रोहित कुमार, दीपक ठाकुर समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
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