सिमुलतला. पूर्व रेलवे के आसनसोल रेल मंडल अंतर्गत अंतिम छोर पर स्थित घोरपारण स्टेशन पर पूर्व से चल रही ट्रेनों के ठहराव को रेलवे द्वारा हटाये जाने के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला परिषद सदस्य विभा सिंह, खुरंडा के पूर्व मुखिया बालदेव यादव, जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक बिनोद यादव उर्फ फुटल कपार व पंचायत समिति सदस्य नागेश्वर यादव ने किया. प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि घोरपारण, डहुआ, पटवा, पचकटिया, बाराकोला, दूधी झरना, पेय झरना समेत दर्जनों गांव के लोगों के लिए ट्रेन ही एकमात्र यातायात का साधन था. रेलवे द्वारा स्टेशन से ट्रेन ठहराव हटाने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है.
रोजगार व शिक्षा पर पड़ा असर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्षों से स्टेशन पर चार पैसेंजर और एक एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव होता था, जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी थी. बच्चे स्कूल-कॉलेज जाते थे और लोग अस्पताल, प्रखंड व जिला मुख्यालय भी ट्रेन से ही जाया करते थे. ठहराव हटने से इन सभी कार्यों में परेशानी उत्पन्न हो रही है.
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
नेताओं व ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ट्रेनों का ठहराव बहाल नहीं किया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने को विवश होंगे.प्रशासनिक अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सिमुलतला रेलवे स्टेशन प्रबंधक अखिलेश कुमार व आरपीएफ इंस्पेक्टर रवि कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया. काफी मशक्कत के बाद लोग अपने-अपने घर लौटे.
रेलवे प्रशासन ने दी सफाई
इस संबंध में आसनसोल रेल मंडल की पीआरओ बिपला बौउरी ने बताया कि घोरपारण स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव नियमित नहीं था, बल्कि विशेष परिस्थितियों में ट्रेनों को रोका जाता था. उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण चाहें तो सीनियर डीसीएम या डीआरएम को आवेदन दे सकते हैं, जिस पर विचार किया जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
